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बिकरू कांड: खुशी का मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराने से कोर्ट का इनकार, आठ पुलिस वालों की हत्या में है आरोपी

Sat, 25 Dec 2021 04:14 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

चौबेपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर बिल्हौर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी।
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अमर और खुशी दुबे की शादी में विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिकरू कांड की आरोपी खुशी दुबे का मनोवैज्ञानिक परीक्षण अन्य संस्था से कराने की बचाव पक्ष के अधिवक्ता की अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अभियोजन ने पूर्व हुए परीक्षण में आरोपी खुशी के पूर्णतया परिपक्व होने के साक्ष्य कोर्ट के समक्ष रखे हैं।खुशी घटना के दौरान वह नाबालिग थी।
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किशोर न्याय बोर्ड ने उसके मानसिक स्तर का परीक्षण कराया था। इसमें उसकी मानसिक स्थिति घटना के दौरान सामान्य युवा जैसी पाई गई थी। इसमें पाया गया कि वह अपराध के परिणाम को समझने में सक्षम है। इस बीच मामला अपर जिला सत्र न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट में स्थानांतरित हो गया।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी खुशी का मनोवैज्ञानिक परीक्षण दोबारा किसी दूसरी संस्था से कराने की प्रार्थनापत्र दिया था। इसे को कोर्ट ने खारिज कर दिया। विशेष लोक अभियोजक विकास कटियार ने बताया कि हाईस्कूल में 50 फीसदी से अधिक अंक आने पर उसकी मानसिक स्थिति ठीक होने की बात पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। अब दोबारा परीक्षण कराने का औचित्य नहीं है। 
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रंगदारी व मारपीट के मामले में नहीं हो सकी सुनवाई
रंगदारी और मारपीट के मामले में बिकरू कांड के चार आरोपियों को शुक्रवार को एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि, पीठासीन अधिकारी के न रहने पर सुनवाई नहीं हो सकी। मामले में अगली तिथि 11 जनवरी तय की गई है। चौबेपुर के बिकरू गांव की रोली शुक्ला ने विकास दुबे व उसके साथियों पर बंदूक के दम पर अवैध वसूली करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

शुक्रवार को एसीजेएम प्रथम कमलकांत गुप्ता की कोर्ट में आरोप निर्धारण पर बहस होनी थी। इसके लिए कोर्ट में हीरू दुबे उर्फ धर्मेंद्र, जिलेदार, गोपाल सैनी और शिवम दुबे को पेश किया गया। कोर्ट में पीठासीन अधिकारी के न होने से आरोप निर्धारण पर बहस नहीं हो सकी।
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