विकास ने दिए थे 40 लाख रुपये
बताया जाता है कि लोगों को धमकाने के लिए वह विकास दुबे के नाम का सहारा लेता था। विकास का उसके घर आना जाना भी था। जय का पैतृक गांव दिलीप नगर है, जो बिकरू से केवल दो किमी दूर है। वहीं से उसका परिवार विकास दुबे के संपर्क में था। बताया जा रहा है कि जब जय ब्याज का धंधा कर रहा था, तो विकास ने उसे 40 लाख रुपये दिए थे।
एक से डेढ़ फीसदी देता था ब्याज
इस पर जय एक से डेढ़ फीसदी ब्याज देता था। घटना के कुछ समय पहले दस लाख रुपये के ट्रांजेक्शन की बात भी विकास दुबे के परिवार के एक शख्स और जय के बीच होने की बात सामने आई थी। जय के पिता की गांव के बाहर पंक्चर की दुकान थी। वहीं पर जय भी बैठता था। साल 2000 में जय की मां पांच बेटों और तीन बेटियों को लेकर कानपुर आ गई थी।
दो-दो हजार रुपये वाली कमेटी शुरू की
यहां ब्रह्मनगर में जय बाजपेई का पुश्तैनी मकान है। मां घर के बाहर पान की दुकान चलाती थी। गांव का एक व्यक्ति जय को प्रिंटिंग प्रेस से कमेटी के धंधे में लाया। साल 2012 में उसे 100 लोगों की दो-दो हजार रुपये वाली कमेटी शुरू की। इससे मिली रकम वर्तमान में भाजपा से जुड़े एक पार्षद की मदद से ब्याज पर चलाना शुरू कर दिया।
विवादित प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त शुरू की
जय के परिवार के लोग भी रेहड़ी-पटरी वालों को ब्याज पर पैसा बांटते थे। इसके बाद जय ने विवादित प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त शुरू की। इसी दौरान सपा के एक नेता के संपर्क में आया और उसका धन भी ब्याज के धंधे में लगाया। धीरे-धीरे ब्याज, नोटबंदी के दौरान काला धन सफेद कराने और विवादित प्रापर्टी खरीदकर जय बाजपेई अरबपति बन गया।
तब अफसरों की जांच रिपोर्ट में सामने आया था
अफसरों की रिपोर्ट में कहा गया कि जय और उसका भाई रजय सपा विधायक के नजदीकी हैं और प्रॉपर्टी व ठेकेदारी का काम करते हैं। जय के खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हैं। इनमें से थाना बजरिया में है, जो संतलाल कुरील ने हत्या के प्रयास और एससी-एसटी के तहत जय, अजय, रजय व चार अन्य लोगों के खिलाफ कराया था। इसमें सबूत न मिलने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। 20 मई 2017 को केडीए के मुख्य अभियंता की तहरीर पर जय के खिलाफ मकान की सील तोड़कर अवैध निर्माण शुरू कर देने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मुकदमे में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है।
पूछताछ में तब जय ने कहा था
बिकरू कांड के बाद पूछताछ में जय ने बताया था कि 15-16 साल पहले वह ब्रह्मनगर में ही एक प्रिंटर के यहां नौकरी करता था। अब बैट्री, इन्वर्टर व कार एसेसरीज की दुकान है। डेढ़ साल पहले होली पर दुबई घूमने गया था। उसने बैंक से लोन लेकर, पुश्तैनी जमीन बेचकर और किरायेदारों से मिली पगड़ी की रकम से जो मकान खरीदे हैं। लगातार दस साल से इनकम टैक्स दे रहा हूं। मकानों का किराया भी आय का स्रोत है।