बाद में वह कंपनी अनुबंध तोड़कर चली गई। नई योजना के तहत प्लांट के लिए जगह नगर निगम उपलब्ध कराएगा। पिछले महीने सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने यहां आकर कूड़ा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण भी किया था।
कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने के लिए जल्द ही स्थानीय स्तर पर अनुबंध किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। - शिवशरणप्पा जीएन, नगर आयुक्त
इस वजह से पहले बंद हो गया था प्लांट
- कूड़े से बिजली बनाने के लिए उसमें प्लास्टिक वेस्ट होना जरूरी है। यहां कूड़ा बीनने वाले कूड़ा घरों से प्लास्टिक निकालकर बेच देते हैं।
- घरों से कूड़ा ले जाने वाले सफाई कर्मी भी प्लास्टिक वेस्ट बेचने लगे।
- कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने के लिए उपकरणों से लेकर जमीन खरीदने के लिए कंपनी ने आईएलएंडएफएस से करोड़ों का लोन लिया, जिसकी ब्याज की रकम भी लगातार बढ़ती जा रही थी।
- पांडु नदी के किनारे प्लांट में बरसात के मौसम में पानी भरने के कारण प्लांट संचालन ठप रहता था।
मौजूदा चुनौतियां
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के पहाड़ों की वजह से जगह की कमी
- नेशनल ग्रिड के रेट से सस्ती बिजली बनाना
- प्लांट की लागत, खर्चे कम रखना