ऐसा कहा जा रहा है कि टैंक के पानी का केमिकल जमीन में बैठने न पाए इसलिए उसे प्रयोग में भी लगातार लिया जाता है। इस टेनरी में इस टैंक का पानी लंबे समय से नहीं निकाला गया। यही वजह है कि वह सूखकर जमीन की परत में जमा गया था। बंद होने की वजह से उसमें गैस भी भर गई थी। क्योंकि इसमें चूना भी मिला था।
इसलिए कहा जा रहा है कि वह सूखकर जमीन पर ही पत्थर जैसा हो गया था। उसे उखाड़ने के बाद और गैस पैदा हुई। जिससे मजदूर उसी में बेहोश होते चले गए। आखिर में उनकी मौत हो गई। अब जबकि मामले में मुकदमा दर्ज हो गया है तो टेनरी मालिक के साथ उन ठेकेदार से भी पूछताछ की जाएगी, जिसने सफाई का ठेका लिया था।
बता दें कि कानपुर शहर भले ही स्मार्ट सिटी में शामिल हो गया हो, लेकिन आज भी सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौतों का होना तकनीकी लिहाज से पिछड़ेपन को दिखाता है। पिछले दो माह से भी कम समय में नौ मौतें हुईं हैं। 18 सितंबर को बर्रा के मालवीय नगर में सेप्टिक टैंक में भी तीन मजदूरों की जहरीली गैस से मौत हो गई थी।
31 अक्तूबर को बिठूर के चकरतनपुर में तीन मजदूरों की मौत हुई। अब गुरुवार को टेनरी के वेस्ट टैंक की सफाई के दौरान तीन की जान चली गई। इस तरह की मौतों में पूरे देश में उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। एक साल में 65 मौतें हुई हैं। देश में 10 साल में 660 लोगों की मौत हुई है।
टेनरियां पहले भी ले चुकी हैं जान
- छह साल पहले बुढ़िया घाट स्थित अनीस टेनरी में गैस रिसाव से टेनरी मालिक समेत दो की मौत।
- चार साल पहले जाजमऊ के अशर्फाबाद स्थित इंपैक्ट टेनरी में टैंक की सफाई के दौरान दो की मौत।
- ढाई साल पहले इब्राहिम की शीतला बाजार स्थित टेनरी में जहरीली गैस के रिसाव से तीन मजदूरों की मौत।
- दो साल पहले चकेरी के संजयनगर में मुन्ना लखपति की टेनरी में गैस रिसाव से दो कर्मचारियों की मौत।