राजपुर (कानपुर देहात)। बेहमई नरसंहार कांड की बरसी पर सोमवार को स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। डकैतों की बर्बरता का शिकार हुए लोगों को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई। गांव के लोगों में अपनों को खोने का दुख दिखा। बेहमई नरसंहार कांड के 41 वर्ष पूरे होने पर भी कोर्ट का फैसला न आने का ग्रामीणों में मलाल है।
सोमवार को बेहमई गांव किनारे स्थित स्मारक स्थल पर हवन पूजन किया गया। ग्रामीणों नेे दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। परिजनों ने न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।
14 फरवरी 1981 को डकैत फूलन देवी ने अपने गिरोह के साथ बेहमई गांव में धावा बोलकर एक कतार में खड़ा कर ग्रामीणों को गोलियों से छलनी कर दिया था। इस दौरान 20 लोगों की मौत हुई थी, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। नरसंहार कांड में मारे गए लोगों की याद में गांव किनारे शहीद स्मारक स्थल बनवाया गया है। इसमें मारे गए हिम्मत सिंह के बेटे बाबूजी सिंह और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विनोद प्रताप सिंह और ग्रामीणों ने स्मारक स्थल पर पुष्प अर्पित किए। बोले, पुलिस की लचर पैरवी और कानूनी दांवपेच के चक्कर में इंसाफ में देरी हुई है। इस दौरान मुकदमे में लगातार पैरवी करते रहे वादी दिवंगत राजाराम सिंह को भी याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस मौके पर समाजसेवी लाल जी सिंह, बेहमई के पूर्व प्रधान जयवीर सिंह, गांधी सिंह, फैलू सिंह, शिवपाल सिंह, बादाम सिंह, तख्त सिंह, अकबर सिंह, राजनारायन सिंह, राजवीर सिंह, कुंवर सिंह, रामकेश सिंह मौजूद रहे।
इन लोगों की हुई थी हत्या
तुलसीराम सिंह पुत्र कल्लू सिंह, गजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, जगन्नाथ सिंह, वीरेंद्र सिंह, रामाधार सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिवबालक सिंह, बनवारी सिंह पुत्र लाखन सिंह, लाल सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह पुत्र महाराज सिंह, हिम्मत सिंह, हुकुम सिंह, हरिओम सिंह, रामऔतार, तुलसीराम पुत्र धनीराम, नजीर खां।