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बैंक लॉकर प्रकरण: आरएम से लेकर शाखा प्रबंधक से दो घंटे पूछताछ, सबकी भूमिका संदिग्ध

Tue, 28 Mar 2023 08:54 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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बैंक ऑफ बड़ौदा, किदवईनगर-के ब्लॉक शाखा में बीते शुक्रवार को लॉकर से चोरी हुए डेढ़ करोड़ के गहनों के मामले में बैंक अफसरों की भूमिका पुलिस को संदिग्ध मिली है। सोमवार को नौबस्ता थाने में बैंक के रीजनल मैनेजर जेके जायस से लेकर शाखा प्रबंधक कमलेश गुप्ता तक से पुलिस ने दो घंटे पूछताछ की, लेकिन वे पुलिस के सवालों का सटीक जवाब नहीं दे सके। ऐसे में पुलिस सभी की भूमिका संदिग्ध मानकर प्रकरण की जांच कर रही है।

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बसंत विहार निवासी ऑर्डिनेंस फैक्टरी से सेवानिवृत्ति सूर्य कुमार अवस्थी की पत्नी रमा का बैंक में लॉकर था। उन्होंने 25 नवंबर 2017 को लॉकर लिया था। इसी बैंक में उनकी बेटी श्रद्धा शुक्ला का भी लॉकर है। आखिरी बार उन्होंने बेटे शशांक के साथ बैंक पहुंचकर कुछ और गहने लॉकर में रखे थे। इसके बाद से लॉकर ऑपरेट नहीं किया।

बीते शुक्रवार को वह लॉकर चेक करने पहुंचीं तो लॉकर टूटा मिला और अंदर रखे गहने गायब थे। मामले में पुलिस ने शाखा प्रबंधक व अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू की। सोमवार को पुलिस ने बैंक के रीजनल मैनेजर जेके जायस, डिप्टी रीजनल मैनेजर आरसी सचान, शाखा प्रबंधक कमलेश गुप्ता व लॉकर इंचार्ज स्वाति मिश्रा से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। पुलिस ने बैंक अधिकारियों से पूछा कि बैंक के अंदर से ग्राहक के डेढ़ करोड़ के गहने लॉकर तोड़कर गायब हुए। जब उन्होंने भूमिका के बारे में पूछा तो सभी अपनी-अपनी सफाई देने लगे। इस पर इंस्पेक्टर संजय पांडेय ने उन्हें फटकार लगाते हुए पूछा कि बैंक के अंदर रखे सामान की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है। इस पर बैंक अफसरों के माथे पर पसीना आ गया।

शाखा प्रबंधक ने उन्हें बताया कि लंबे समय से अनऑपरेट किए गए बैंक लॉकरों को तोड़ने की कानूनी प्रक्रिया है। उसका पालन किया गया था। बोले उन्हें किदवईनगर शाखा में आए एक साल ही हुआ है। इस पर इंस्पेक्टर ने उनसे पूछा कि इससे वो यह कैसे सिद्ध करेंगे की वारदात में उनकी कोई भूमिका नहीं। यह सुनकर शाखा प्रबंधक इंस्पेक्टर से नजरें चुराने का प्रयास करने लगे। इंस्पेक्टर ने बैंक अफसरों से कहा कि पीड़ित ग्राहक का माल उनके बैंक से गया है तो उनकी ही जिम्मेदारी भी बनती है। ऐसे में बैंक अफसर या तो ग्राहक से समझौता करे या उन्हें जेल जाना पड़ेगा। इंस्पेक्टर की बात सुनकर महिला लॉकर इंचार्ज घबरा गई। थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि सभी बैंक अफसरों की पूछताछ की गई है। लॉकर तोड़ने वाले एजेंसी और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।

तीन साल में दो बार की गई लॉकर तोड़ने की प्रक्रिया
बैंक अफसरों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि फरवरी 2020 के बाद से वारदात के पहले तक अनआपरेट बैंक लॉकरों को तोड़ने की दो बार प्रक्रिया की गई थी। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि पूर्व में कराची खाने में हुई लॉकरों को काटकर गहनों की चोरी की तरह ही इस वारदात को भी अंजाम दिया गया होगा। पुलिस के अनुसार वारदात को अंजाम देने वालों ने लॉकर के अंदर लगा पूरा लॉक ही उखाड़ दिया था, जो बरामद नहीं हुआ था। इस पर बैंक अफसरों ने बताया कि यह प्रक्रिया उनकी मौजूदगी में हुई थी। इसके बाद भी लॉकर टूट जाने को लेकर बैंक प्रबंधन की भूमिका को पुलिस संदिग्ध मान रही है।
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पीएससी समेत पुलिस फोर्स की तैनाती से बचा बवाल
बैंक के अंदर फैली अव्यवस्था को लेकर ग्राहकों में खासा रोष देखने को मिला। ग्राहकों के गुस्से को देखते हुए डीसीपी साउथ सलमान ताज पाटिल ने नौबस्ता समेत बैंक के बाहर गुजैनी, बर्रा, हुनमंतविहार थाने का फोर्स तैनात रखा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक प्लाटून पीएसी भी तैनात की गई थी। फोर्स की तैनाती से किसी तरह का बवाल होने से बच गया।
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