25 हजार वर्ष पुराने शैल चित्र/रॉक पेंटिंग
- फोटो : amar ujala
बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल की चट्टानों में लगभग 25 हजार वर्ष पुराने शैल चित्रों/रॉक पेंटिंग को हीरा खनन से संभावित नुकसान पर हाईकोर्ट ने सरकार और पुरातत्व विभाग से जवाब तलब किया है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय, खनिज मंत्रालय व पुरातत्व विभाग से सच्चाई पेश करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट में अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा जंगल को सरकार ने हीरा खनन के लिए बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज कंपनी को 50 साल के लिए पट्टे पर दिया है। इससे दो लाख से ज्यादा पेड़ों के कटने और जंगल की चट्टानों में दुर्लभ शैल चित्र नष्ट होने की आशंका है।
25 हजार वर्ष पुराने शैल चित्र
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष और पर्यावरण पैरोकार डॉ. पीजी नाज पांडेय ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में जनहित याचिका दायर की। इसमें कहा कि बकस्वाहा जंगल में 25 हजार वर्ष पूर्व के अति प्राचीन रॉक पेंटिंग मिली हैं। यह पाषाण युग की मानव जाति की जानकारी देने वाले महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
इन्हें पुरातात्विक संपदा घोषित किया जाना चाहिए। याचिका में केंद्र, मध्य प्रदेश सरकार, खनन विभाग और पुरातत्व सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) को पक्षकार बनाया है। शुक्रवार को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने पुरातत्व विभाग को आदेश दिया कि बकस्वाहा के शैल चित्रों की सच्चाई सामने लाकर रिपोर्ट पेश करें।
हाईकोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय, माइनिंग मंत्रालय और पुरातत्व विभाग (भोपाल सर्किल) से भी जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका की पैरवी अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने की। पुरातत्व विभाग ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में बकस्वाहा रॉक पेंटिंग की जानकारी मिली है। वहां टीम भेजी जा रही है। अमर उजाला ने एक जुलाई के अंक में बकस्वाहा के शैल चित्रों की कई तस्वीरों के साथ प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।