बीएड कॉलेज के संचालकों का कहना है कि बीएड की सीटें वैसे ही पूरी नहीं भर पाती हैं, सत्र लेट होने से छात्र बंट जाते हैं। तकनीक संस्थानों में इस बार जेईई मेन जुलाई में हुआ था। फिर जेईई एडवांस अगस्त के अंतिम सप्ताह में और परिणाम 17 सितंबर को घोषित हुआ।
जेईई मेन की रैंकिंग के आधार पर एकेटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक के दाखिले होते हैं। एकेटीयू ने इस बार बॉयोटेक इंजीनियरिंग ब्रांच में दाखिला सीयूईटी के परिणाम के आधार पर होना तय किया है। सीयूईटी का परिणाम भी काफी देरी से निकला।
इस वजह से भी एकेटीयू ने काउंसलिंग शेड्यूल देरी से जारी किया है। हालांकि इंजीनियरिंग कॉलेजों का कहना है कि प्लानिंग ठीक से न होने की वजह से शेड्यूल लेट हुआ है। इसका प्रभाव बीएड और बीटेक छात्रों के शैक्षणिक सत्र पर पड़ेगा।
काउंसलिंग में देरी पर जताई नाराजगी
एआईटीएच की निदेशक प्रो. रचना अस्थाना ने लेट काउंसलिंग से नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि एचबीटीयू सहित अन्य विवि ने तो सीटें भर ली हैं, लेकिन एकेटीयू से संबद्ध कॉलेजों में शुरुआत तक नहीं हुई है।
हरसहाय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर श्रीवास्तव ने कहा कि बीएड का सत्र करीब डेढ़ महीना लेट हुआ है। नवंबर अंत तक तो काउंसलिंग ही चलेगी, फिर पढ़ाई शुरू होगी। तृतीय वर्ष के परिणाम में देरी की वजह से काउंसलिंग देरी से शुरू हुई।