आजादी के आंदोलनों की पृष्ठभूमि रहे शिवाला स्थित तिलक हॉल ने गुलामी जंजीरें तोड़ते हुए नए भारत को भी देखा है। 15 अगस्त 1947 की उस सुबह का भी गवाह है, जब देश ने आजादी पाई थी। 1925 में कानपुर में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान तिलक हॉल को बनाने का फैसला लिया गया था।
1925 में नवाबों से जमीन खरीदी गई, 24 सितंबर 1931 को जवाहर लाल नेहरू ने नींव रखी और 24 जुलाई 1934 को महात्मा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था। उस वक्त इसके प्रबंधक नारायण प्रसाद अरोड़ा थे। यह तिलक मेमोरियल सोसाइटी की संपत्ति है, जिसके वर्तमान चेयरमैन, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता श्रीप्रकाश जायसवाल हैं।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता 84 साल के शंकर दत्त मिश्रा बताते हैं कि निर्माण के समय यहां केवल टीन शेड हुआ करता था। पास में पार्क है, जिसमें क्रांतिकारी बैठक करते और व्यायामशाला में लाठी चलाना सीखते थे। फिलहाल पार्क को नगर निगम को सौंप दिया गया है। अब उसका नाम श्रद्धानंद पार्क है।