आश्वासन दिया गया था कि इसका ओवरटाइम मिलेगा, लेकिन अभी तक उन्हें बढ़ा हुआ पैसा नहीं मिला है। कहा कि कुछ दिनों में ही होली का त्योहार है। इससे पैसों की जरूरत है, लेकिन अभी भी अधिकारी ओवरटाइम नहीं दे रहे हैं। इससे आक्रोशित होकर सभी चालकों ने सोमवार को बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं। वे वहीं पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए।
अपनी मांगों पर अड़े हैं चालक
इधर, रोड पर ई-बसें न निकले से लोगों को ऑटो और टेंपो से यात्रा करनी पड़ी। इससे पैसा ज्यादा लगने के साथ ही परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, चालकों की हड़ताल की जानकारी मिलने पर अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए। चालक अपनी मांगों पर अड़े हैं। उनका कहना है कि मांगे मानने के बाद ही ई-बसें सड़कों पर दौड़ेंगी।
चालकों की वेतन से संबंधित कुछ मांगें हैं। उस पर कंपनी के पदाधिकारियों से बातचीत जारी है। देर शाम तक बसों का संचालन नहीं हो सका है। मनाने का प्रयास किया जा रहा है। -डीबी सिंह, ई-बसों के मुख्य संचालन अधिकारी
चालकों को 23 मार्च तक बढ़ा हुआ पैसा देने का आश्वासन दिया है। वे तत्काल भुगतान की मांग पर अड़े हैं। मंगलवार सुबह एक बार फिर से समझाने का प्रयास किया जाएगा। -मयंक दीक्षित, ई-बस संचालन कंपनी के मैनेजर
रोजाना ढाई लाख आता राजस्व
शहर के छह रूटों पर बसों के संचालित होने पर रोजाना 16 से 18 हजार लोग यात्रा कर रहे हैं। हर दिन किराये के रूप में करीब ढाई लाख रुपये का राजस्व आ रहा है। ई-बसों के रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के नजदीक से होकर जाने से यात्री इनका उपयोग ज्यादा कर रहे हैं।