अवनीश के फोन नंबरों की एक साल की कॉल डिटेल देखी जा रही है। इससे कुछ सफेदपोशों, बिल्डरों के नाम आ सकते हैं। सीडीआर के अलावा अवनीश के मोबाइल की भी तलाश की जा रही है। इसमें भी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज व मैसेज होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। -अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर
अवनीश के कई गुर्गे संभालते थे केडीए व नगर निगम
अवनीश पुलिस विभाग, केस्को व अन्य विभागों में खेल करता था। वहीं, उसके गुर्गे राहुल बाजपेई, मनोज यादव समेत कई नगर निगम और केडीए का काम संभालते थे। मनोज यादव को पुलिस जेल भेज चुकी है, जबकि राहुल बाजपेई अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
पत्नी के एनजीओ को काम दिलाता था अवनीश
अवनीश दीक्षित ने प्रेस क्लब का पदाधिकारी बनने के बाद पुलिस के साथ ही दूसरे विभागों में भी पांव पसार लिए थे। कर्मचारियों व अधिकारियों का सिंडीकेट तैयार करने के बाद दूसरों को काम दिलाकर मोटी रकम लेता था। वहीं, उसने पत्नी प्रतिमा दीक्षित के नाम से प्रतिमा चैतन्य मंडल परिवार नाम से एनजीओ बना लिया। वह एनजीओ को काम दिलाकर भी माल कमाता था।
अवनीश के राजदार लकी और अंशुल की तलाश
अवनीश दीक्षित के राजदार लकी और अंशुल नाम के शख्स की तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लकी और अंशुल अवनीश के कामों के राजदार हैं। ये दोनों जूही और बाबूपुरवा के बीच के रहने वाले बताए जाते हैं। लकी को लेकर अवनीश की कुछ समय पहले एक दरोगा से भी झड़प भी हुई थी। दरोगा ने लकी को बीच सड़क पर जन्मदिन का केक काटने से मना किया था। इस पर अवनीश ने दरोगा को तबादले की धमकी दी थी।
घर के सामने नहीं बज सकता था बैंडबाजा
अवनीश दीक्षित के घर के सामने एक धर्मशाला है। इस धर्मशाला में शादियां भी होती हैं, लेकिन बैंड-बाजा नहीं बजता था। इलाकाई लोगों ने पुलिस को बताया कि अवनीश के परिवार के लोग धर्मशाला में बैंड-बाजा नहीं बजने देते थे। अगर कोई बजाता था तो अवनीश व उसके परिजन पहले खुद और फिर पुलिस पर दबाव बनाकर बंद करा देते थे।
व्यापारी व सफेदपोश कराते थे मॉल से शॉपिंग
अवनीश और उसका परिवार शहर के नामचीन मॉल्स से रोजमर्रा का सामान और ब्रांडेड कपड़ों आदि की शॉपिंग करता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि भुगतान व्यापारी और सफेदपोश करते थे। इन लोगों के बारे में भी छानबीन चल रही है।