हत्याकांड के बाद शूटर लवलेश तिवारी के पिता का बयान भी सामने आया था। उन्होंने कहा था कि लवलेश का हमसे लेना-देना नहीं था। हत्याकांड से पांच से छह दिन पहले लवलेश बांदा स्थित घर आया था। पहले भी वो कभी-कभी घर आता था। पहले भी वो एक मामले में जेल गया था। लवलेश नशा करता है।
माफिया अतीक और अशरफ को गोली मारकर मौत के घाट उतारने में गिरफ्तार लवलेश तिवारी बांदा शहर के केवटरा मोहाल का रहने वाला है। स्नातक फेल लवलेश नशे का आदि बताया गया है। पिता यज्ञ तिवारी ने बताया कि छह रोज पहले घर आया था। उसका ढर्रा सही नहीं रहा।
स्नातक फेल होने के बाद उसने पढ़ाई बंद कर दी थी। गलत संगत में चला गया। घरवालों ने भी उसका पीछा छोड़ दिया था। चार भाइयों में तीसरे नंबर का था। कोई काम नहीं करता था। पिता ने बताया कि इतनी बड़ी वारदात कैसे कर दी? वह खुद नहीं समझ पा रहे। लवलेश का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एक छात्रा को तमाचा जड़ने पर आठ दिन जेल में रहा है। घटना से लवलेश का परिवार दहशत में है।
पुलिस ने बरामदगी की कोशिश भी नहीं की
पुलिस ने तीनों शूटरों से जो बरामदगी दिखाई है, उनमें तीन पिस्टल हैं। मोबाइल के संंबंध में कोई जिक्र नहीं है। सवाल यह है कि आखिर यह कैसे हो सकता है कि कासगंज, बांदा और हमीरपुर जनपदों के रहने वाले शूटरों के पास मोबाइल न हो। वह बिना मोबाइल के प्रयागराज आए हों, इसकी भी संभावना न के बराबर है।
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बड़ा सवाल, बिना फोन के कैसे मिली अतीक-अशरफ की लोकेशन
प्रयागराज से उनका कोई कनेक्शन कभी नहीं रहा, यह बात तीनों के घरवाले भी बता चुके हैं। यह भी बताया कि तीनों कभी प्रयागराज नहीं गए। ऐसे में तीनों के यहां बिना मोबाइल के आने की बात गले नहीं उतरती। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उनके पास मोबाइल फोन नहीं था, तो उन्हें कैसे पता चला कि अतीक व अशरफ कॉल्विन अस्पताल पहुंचने वाले हैं।