कानपुर देहात। ठंड की शुरुआत हो गई है। वहीं, परिषदीय स्कूलों में अभी तक बच्चों को जूते-मोजे, ड्रेस व स्वेटर नहीं मिले हैं। बच्चे बिना जूते मोजे के ही स्कूल जा रहे हैं। शासन ने इस बार ड्रेस, जूते-मोजे व स्वेटर के लिए अभिभावकों के खाते में धन भेजने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अभी तक 60 फीसदी बच्चों की डाटा फीडिंग हो सकी है।
जिले के 1926 परिषदीय विद्यालयों में एक लाख 74 हजार 767 बच्चे अध्ययनरत हैं। शासन ने इस बार जूते-मोजे, स्वेटर व ड्रेस के लिए प्रति बच्चे के हिसाब से 11 सौ रुपये अभिभावकों के खाते में भेजने की बात कही है। इन रुपयों से दो जोड़ी ड्रेस, एक जोड़ी जूता मोजा व एक स्वेटर खरीदना है। धन भेजने के लिए विभाग की ओर से सभी छात्रों का डाटा मांगा गया।
शुरुआत में शिक्षकों ने संसाधन न होने का बहाना कर डाटा फीडिंग को टालने की कोशिश की। हालांकि बाद में अफसरों का दबाव बढ़ने पर शिक्षकों ने फीडिंग शुरू कर दी। जिले में अब तक 60 प्रतिशत बच्चों का ही डाटा फीड हो सका है, जब कि ठंड की शुरूआत हो चुकी है। इस बीच पोर्टल पर डाटा की फीडिंग बंद हो गई है।
शिक्षकों की माने तो कहीं आधार तो कहीं खाता नंबर में नाम मैच न करने संबंधी कई तरह की दिक्कतें है। ऐसे में बड़ी संख्या में अभिभावकों के खाते में धन न जाने की समस्या रहेगी।
वहीं डाटा फीडिंग करने वाले शिक्षक तो जिम्मेदारी से मुक्त हो गए हैं लेकिन शासन की तरफ से अभिभावकों के खाते में धन नहीं भेजा गया है। अक्तूबर खत्म हो गया हैं। नवंबर से ठंड और बढ़ने पर बच्चे बिना ड्रेस व स्वेटर के चप्पलें पहन स्कूल आने को मजबूर होंगे।
जिले में 99 हजार बच्चों की फीडिंग का काम पूरा हो गया है। इनके अभिभावकों के खाते में धन स्थानांतरण की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद अभिभावकों को स्वेटर, ड्रेस व जूते मोजे की खरीद करनी होगी। इस बीच पोर्टल पर फीडिंग रोक दी गई है। जैसे ही शुरुआत होगी शेष बच्चों का विवरण फीड कराया जाएगा। - मुश्ताक अहमद खान, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता।