कानपुर। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा। नौ दिनों तक चलने वाली यह विशेष नवरात्रि 23 जुलाई तक रहेगी। इस दौरान मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ तंत्र साधना, विशेष अनुष्ठान और गुप्त आराधना का विशेष महत्व रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, संतों और तांत्रिक उपासकों की साधना का पर्व है। इसमें उत्सव की अपेक्षा ध्यान, मंत्र-जाप और एकांत साधना को विशेष महत्व दिया जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान अनेक साधक दस महाविद्याओं मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की आराधना करते हैं।
पं. पीएन द्विवेदी के अनुसार गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है। पहली माघ मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में। इसके महत्व की जानकारी सीमित लोगों को होने और साधना के गुप्त स्वरूप के कारण इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इसे गायत्री नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान साधक ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे... महामंत्र का जाप करते हैं।