जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ेगा, रोगियों की समस्या और बढ़ेगी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी (संचारी रोग) डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि धुंध बढ़ने के कारण सांस रोगियों की दिक्कत बढ़ रही है। जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ेगा रोगियों की समस्या और बढ़ेगी। रोगियों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण में मौजूद एलर्जेंट से सांस नली की सूजन बढ़ जाती है। दमा के रोगियों के फेफड़ों का लचीलापन कम हो जाता है।
ओपीडी में आने वाले और भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या दोगुना
सांस नली संकरी हो जाती है, जिससे कार्बन डाई आक्साइड निकल नहीं पाती। डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि ओपीडी में आने वाले और भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या दोगुना हो गई है। पहले दमा और अस्थमा अटैक के औसत छह रोगी आते थे, अब 12-13 आ रहे हैं। यही स्थिति भर्ती होने वाले रोगियों की है।