कानपुर में शस्त्र लाइसेंस के फर्जीवाड़ों के सभी मामलों की जांच स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने करनी शुरू कर दी है। पिछले 70 साल में जितने शस्त्र लाइसेंस बने हैं, उन सभी का सत्यापन करना शुरू कर दिया है। 2019 में हुए फर्जीवाड़े की जांच भी शुरू हो चुकी है।
एसआईटी ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में अफसरों के साथ बैठक की और रिकॉर्ड लिए। टीम में कई इंस्पेक्टर व दरोगा हैं। जनपद में 2019 में 77 फर्जी शस्त्र लाइसेंस जारी हुए थे। असलहा बाबू, दो वकील व तीन कारीगर जेल गए थे।
बिकरू कांड के बाद खुलासा हुआ कि कलेक्ट्रेट से विकास दुबे व एक मंत्री समेत 200 लोगों की शस्त्र लाइसेंस फाइलें गायब हैं। इसमें केस दर्ज किया गया। शासन के आदेश पर जांच शुरू करने वाली एसआईटी ने अपनी तफ्तीश में इन दोनों मामलों को शामिल किया है।
क्या मुख्य जिम्मेदार भी फंसेंगे
77 फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में तत्कालीन एसएसपी अनंत देव ने एसआईटी से जांच कराई थी। इसमें कार्रवाई असलहा बाबू, वकील व मुंशी-कारीगरों तक ही सीमित रही थी। जबकि स्पष्ट था कि असलहा रजिस्टर पर सिटी मजिस्ट्रेट के असली हस्ताक्षर थे।