आयुध निर्माणियों में आम लोगों के लिए बनने वाले असलहों की बिक्री अब विभिन्न शहरों में मौजूद आर्म्स डीलर भी कर सकेंगे। यह व्यवस्था दूरदराज से आने वाले ग्राहकों की हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। फैक्ट्री अफसरों के मुताबिक आयुध निर्माणी बोर्ड को इस बाबत भेजा गया प्रस्ताव काफी आगे बढ़ चुका है।
उधर टाइटेनियम एलॉय से बनी हल्की रिवॉल्वर ‘निर्भीक ’को भी निर्यात करने की तैयारियां चल रही हैं। यह भी तय किया गया है कि रिवॉल्वर बनाने का संपूर्ण काम अब दोनों फैक्ट्रियों के बजाय सिर्फ एसएएफ में होगा। कानपुर की स्माल आर्म्स और फील्ड गन फैक्ट्री में तमाम प्रकार के रिवॉल्वर का निर्माण किया जाता है।
वहीं कोलकाता स्थित आयुध फैक्ट्री में पिस्टल बनाकर लाइसेंसधारकों को बेची जाती है। गौरतलब है कि पूर्व में आयुध निर्माणी गैर प्रतिबंधित (एनपी) बोर के असलहों की बिक्री आर्म्स डीलरों के जरिए करती थी।
मगर बाद में इसे बंद कर दिया गया था। वर्तमान में फैक्ट्री में बनने वाली राइफल और बारह बोर की बंदूकों की बिक्री इन डीलरों के जरिए की जाती है। फील्ड गन फैक्ट्री के महाप्रबंधक राकेश कुमार के मुताबिक एक बार फिर यह व्यवस्था आरंभ की जा रही है।
देश भर के आर्म्स डीलर अपने मौजूदा लाइसेंस पर फैक्ट्री के रिवॉल्वर-पिस्टल भी बिक्री के लिए ले सकेंगे। डिमांड के हिसाब से उन्हें असलहे उपलब्ध कराए जाएंगे। वे अपना मुनाफा लेकर इसे ग्राहकों को बेचेंगे। अभी दूरदराज के लोग यहां रिवॉल्वर लेने आते हैं, जिसके लिए तमाम औपचारिकताएं करनी होती हैं।
इस संबंध में बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर रक्षा मंत्रालय से अनुमति मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक आमजन की सुविधा के अलावा ज्यादा से ज्यादा रिवॉल्वरों की बिक्री भी इसका एक प्रमुख कारण है। महाप्रबंधक राकेश कुमार ने यह भी बताया कि ‘निर्भीक’ के निर्यात की भी तैयारियां की जा रही हैं।
पांच सौ पचास ग्राम वजन की यह रिवॉल्वर देश-विदेश में काफी लोकप्रिय है। बीते एक साल में करीब 350 पीस की बिक्री की गई है।
वहीं स्माल आर्म्स फैक्ट्री के महाप्रबंधक पीसी बरनवाल ने बताया कि वर्ष 2015-16 से रिवॉल्वर बनाने का पूरा काम स्माल आर्म्स फैक्ट्री को दिया जा रहा है। फील्ड गन फैक्ट्री में लगी मशीनों को यहां शिफ्ट किया जाएगा। इससे फैक्ट्री का वर्कलोड भी खासा बढ़ेगा।