रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे भारतीय सैनिकों का शौर्य ऐसा है कि सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी उनका सम्मान होता है। प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जो भारतीय सैनिक दूसरे देशों की रक्षा या स्वतंत्रता के लिए लड़ने गए थे। उनकी चर्चा सम्मानपूर्वक दुनिया भर में होती है। हमारे सैनिकों की बहादुरी और मानवता की चर्चा तो भारत से बाहर भी मशहूर है। हमारी संस्कृति में मानवता है। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध इसका उदाहरण है। इस युद्ध में पाकिस्तान के 90,000 से अधिक सैनिकों ने भारत के सामने सरेंडर कर दिया था। उनके साथ चाहे जैसा सुलूक किया जा सकता था। पर हमारी संस्कृति देखिए कि उन सैनिकों के प्रति पूरी तरह मानवतावादी रवैया अपनाया और आगे चलकर उन सैनिकों को पूरे सम्मान के साथ उनके देश भेज दिया। शत्रु सैनिकों के साथ हुए ऐसे व्यवहार को वो मानवता के स्वर्णिम अध्यायों में से एक मानते हैं।
चकेरी एयरफोर्स स्टेशन में सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिक अपने राष्ट्र की रक्षा कर रहा है। वह अपना कर्तव्य निभा रहा है, इसलिए आपको भारत के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलेगा। जहां हमने किसी दूसरे देश के सैनिक के साथ कभी अमानवीय व्यवहार किया हो।
उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के साथ मुलाकात कर वो सम्मानित महसूस कर रहे हैं। यह किसी संयोग से कम नहीं है कि हम अपने पूर्व सैनिकों के सम्मान के लिए कानपुर जैसी जगह पर एकत्र हुए हैं। सैन्य इतिहास की श्रेणी में कानपुर अपना एक अलग ही महत्व रखता है। 1857 में जब भारत के स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई तो उस समय पेशवा नाना साहब ने कानपुर के बिठूर से ही विद्रोह का नेतृत्व किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जिस आजाद हिंद फौज का गठन किया। उसकी पहली महिला कैप्टन लक्ष्मी सहगल का कानपुर से बड़ा आत्मीय नाता रहा। उन्होंने तो अपने जीवन का आखिरी क्षण भी कानपुर में ही बिताया। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा गीत के रचयिता पार्षद श्याम लाल गुप्ता कानपुर के हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेई ने बहुत बड़ा समय शहर में बिताया। कानपुर महान विभूतियों का शहर है।
उन्होंने कहा कि सैनिकों से उनका लगाव छात्र जीवन से एनसीसी के रूप में था। गृह मंत्री के रूप में और विशेष कर रक्षा मंत्री के रूप में तो सशस्त्र बलों के साथ उनका आत्मीय नाता रहा है। कई बार तो ऐसा लगता है कि मेरे पिछले जन्मों के कुछ संचित पुण्य होंगे कि मुझे हमारे सैनिकों के साथ इतना आत्मीय संबंध बनाने का मौका मिला।
कभी एक सैनिक के नजरिए से भी सोचें
रक्षामंत्री ने कहा कि इस देश का हर नागरिक, चाहे वह किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो। वह अपने सैनिकों के प्रति एक विशेष स्नेह रखता है। वो कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से अपने सभी पूर्व सैनिकों को, देश की उनकी सेवा के लिए नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि सैनिकों के साथ हमारा आत्मीय संबंध तो है ही लेकिन हम यदि कभी एक सैनिक के नजरिए से सोचें, तो हमें देश के प्रति उनके लगाव की गहराइयों में उतरने का मौका मिलेगा। सेना का कोई जवान कारगिल की चोटियों पर तैनात है, तो नेवी का कोई जवान हिंद महासागर की गहराइयों में हमारी सुरक्षा कर रहा है, तो वहीं कोई एयर वारियर हमारे वायु क्षेत्र की सुरक्षा कर रहा है।
मैं रहूं या ना रहूं मेरा देश रहे
कानपुर। रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक का सबसे बड़ा धर्म यह हो जाता है कि मैं रहूं या ना रहूं, मेरा देश रहना चाहिए। क्योंकि इस देश की निरंतरता में वह भी जीवित रहेगा, उसका नाम भी जीवित रहेगा। एक सैनिक परिवार, जाति और पंथ जैसी सोच से कहीं ऊपर उठकर पूरे राष्ट्र के बारे में सोचता है। वह जानता है कि उसकी जाति, उसके परिवार व उसके पंथ, इन सब का अस्तित्व इस राष्ट्र के अस्तित्व से है। यदि यह राष्ट्र सनातन रहा, तो यह सारी चीज भी सनातन रहेगी। इसलिए इस राष्ट्र के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए, इस राष्ट्र की जीवंतता को बनाए रखने के लिए उसे वह नैतिक बल मिलता है, जिस कारण वह मौत का भी सामना करने को तैयार रहता है।
यह देश सैनिकों को अकेला नहीं छोड़ने वाला
रक्षामंत्री ने कहा कि देश (सैनिक के किसी भी मुसीबत में अकेला नहीं छोड़ने वाला। उसे यह लगे, कि उससे पहले जो लोग सैनिक रह चुके हैं, और उन्होंने राष्ट्र के लिए जो अपना सब कुछ समर्पित किया, उसके लिए उन्हें पूरा राष्ट्र कृतज्ञता से नमन कर रहा है। एक राष्ट्र के रूप में हमारा कर्तव्य यह होना चाहिए, कि हम उस सैनिक के साथ तथा उसके परिवार के साथ, ऐसा व्यवहार करें, कि आने वाली कई पीढियों तक, जब भी कोई व्यक्ति सैनिक बने, तो उसके मन में यह भाव रहे, कि यह देश उसे अपना परिवार मानता है।
पूर्व सैनिकों का विशेष ध्यान दिया
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब से हम सरकार में आए हैं तब से हमने पूर्व सैनिकों पर विशेष ध्यान दिया है। चाहे वह वन रैंक वन पेंशन लागू करने की बात हो, या फिर उनके लिए हेल्थ केयर कवरेज करने की बात हो, उनके दोबारा रोजगार की बात हो, या फिर समाज में उनके सम्मान की बात हो, हम लगातार अपने वेटरेंस का ख्याल रखने की ओर और ज्यादा समर्पित होते जा रहे हैं।
देश के रक्षकों में ईश्वरीय अंश
उन्होंने कहा कि जीवन की रक्षा करने वाले डॉक्टरों को हमारे यहां भगवान का रूप माना गया है। यदि ईश्वर हमारा रक्षक है। डॉक्टर ईश्वर स्वरूप हैं तो कहीं ना कहीं हमारी सीमाओं पर जो लोग हमारी सुरक्षा कर रहे हैं। उन रक्षकों में भी ईश्वर का अंश तो मौजूद होगा ही। इसलिए अपने भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान करना तथा उनके परिवार की देखभाल करना। यह ईशपूजा से कम नहीं होता। वहीं कहा कि वो भारतीय सैनिकों के साथ-साथ विदेशी सैनिकों के मेमोरियल में भी जाते हैं। हम किसी भी योद्धा का सम्मान करते हैं। बात जब भारतीय वेटरंस की आती है तो उनके लिए सम्मान के साथ-साथ अपनापन भी आ जाता है।
वह ह्रदय नही है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं
पूर्व सैनिक दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायु सेना स्टेशन, कानपुर युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, एयर मार्शल विभास पांडे, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, अनुरक्षण कमान, एयरफोर्स स्टेशन के एयर ऑफिसर कमांडिंग कानपुर के एयर कमोडोर एमके प्रवीण मौजूद रहे। वहीं कार्यक्रम के दौरान विभास पांडे ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्ता की रचना जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं, वह ह्रदय नही है पत्थर है। जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं की रचना सुनाकर पूर्व सैनिकों के योगदान की सराहना की।
एंट्री एयर क्राफ्ट गन और एएन-32 का किया गया प्रदर्शन
चकेरी स्टेशन में पूर्व सैनिकों की पेंशन, स्वास्थ्य, लोन आदि से जुड़े 16 स्टाल लगाए गए थे। इनका रक्षामंत्री ने निरीक्षण किया। इस दौरान एंटी एयरक्राफ्ट गन और एएन-32 विमान का भी प्रदर्शन किया गया था। एयरक्राफ्ट गन 1600-2000 राउंड फायर करने में सक्षम है। वहीं पूर्व सैनिकों और सैनिकों ने विमान और गन के साथ सेल्फी ली।
राष्ट्रगान से शुरूआत, भारत माता की लगे जयकारे
कार्यक्रम की शुरूआत राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद रक्षामंत्री ने सभी को मकर संक्रांति, खिचड़ी की बधाई दी। कहा कि देश भर में त्योहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। रक्षामंत्री के भाषण खत्म होने के बाद भारत माता की जयकारे लगे। रक्षा मंत्री के साथ पूर्व सैनिकों ने फोटो खिंचवाई और सेल्फी भी ली।
एक हजार से ज्यादा पूर्व सैनिक हुए शामिल
कानपुर। पूर्व सैनिक दिवस पर तीनों सेनाओं के करीब एक हजार से ज्यादा पूर्व सैनिक अपने परिजनों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद से जुड़े 250 से ज्यादा पूर्व सैनिक पहुंचे। लेफिटनेंट कर्नल बीएस राठौर, कैप्टन महेश सिंह, सूबेदार मेज़र पुष्पेंद्र सिंह, सूबेदार मेजर नरेंद्र कुमार मिश्रा, सूबेदार हरमोहन सिंह और स्वतंत्र कुमार मिश्रा आदि मौजूद रहे।