स्टोर में आलू 10 से 11 रुपये किलो के भाव में रखा गया था लेकिन अब तो लागत भी नहीं मिल रही है। दरअसल पश्चिम बंगाल में आलू की फसल खराब होने की बात सामने आई थी। इसके बाद वहां और यूपी के कोल्ड स्टोरों में बंपर आलू की खरीद की गई थी।
इसके बाद मांग कम होने से आलू के दाम थोक में कम होने लगे। कानपुर आलू आढ़ती एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिशंकर गुप्ता ने बताया कि टनों आलू खराब हो गया। करोड़ों का नुकसान कानपुर समेत प्रदेश भर के आढ़तियों को हुआ है। पुराना आलू मंडी में सड़ रहा है कोई खरीदार नही है।
नया आलू तेजी से मंडी में आ रहा है। थोक में आलू के दाम बेहद कम हैं, लेकिन फुटकर में मुनाफाखोरी है। व्यापारियों ने रेट फिक्स कर लिया है। पुराना आलू तो बहुत सस्ता बिकना चाहिए, लेकिन अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।