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UP: 'सॉरी एवरी वन...', चार बार नस काटने की कोशिश, आईआईटी कानपुर के बीटेक छात्र ने दी जान; मौत पर उठे ये सवाल

Tue, 30 Dec 2025 08:06 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर में आईआईटी में बीटेक के छात्र ने खुदकुशी कर ली। उसने चाकू से चार बार हाथ की नस काटने की कोशिश की। फिर फंदा लगाकर जान दे दी। छात्र जय राजस्थान के अजमेर का रहने वाला था। वह बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग में अंतिम वर्ष का छात्र था।
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iit kanpur suicide - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कानपुर आईआईटी में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र जय सिंह मीणा (26) ने रविवार रात फंदा लगाकर जान दे दी। इससे पहले उसने चार बार हाथ की नस काटने की कोशिश की। एक नोट बुक में सुसाइड नोट... सॉरी एवरी वन लिखा मिला है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
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कल्याणपुर एसीपी आशुतोष कुमार ने बताया कि राजस्थान के अजमेर के अवधपुरी निवासी गौरीशंकर का बेटा जय सिंह मीणा आईआईटी में बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग में बीटेक अंतिम वर्ष का था। हॉस्टल नंबर दो के कमरा नंबर 148 में रहता था। 

परिजन के लगातार फोन करने के बाद जब कॉल रिसीव नहीं हुई तो उसके दोस्त से बात की। इसके बाद सोमवार सुबह आईआईटी प्रशासन को घटना की जानकारी हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने दरवाजा तोड़ा तो छात्र का शव पाइप से चादर के सहारे लटका मिला।
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छात्र के नोट बुक में एक लाइन का सुसाइड नोट लिखा मिला है। फॉरेंसिक ने बुक और मोबाइल को जांच के लिए कब्जे में लिया है। छात्र के परिजनों को जानकारी दे दी गई है। एसीपी के मुताबिक शव करीब 10-12 घंटे पुराना लग रहा है।
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वहीं, एडीसीपी पश्चिम कपिल देव सिंह ने बताया कि घटना के पीछे का कारण परिजन के आने पर पता चलेगा। परिजन अगर आरोप लगाते हैं तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। बताया कि कमरे में साथ रहने वाला दोस्त छुट्टी पर घर गया है। उससे भी जानकारी जुटाई जा रही है कि आखिरकार क्या छात्र जयसिंह ने उसे कोई बात साझा की थी।

बैक पेपर क्लियर न होने से दो बार प्लेसमेंट में नहीं मिला मौका तो चुनी मौत
आईआईटी के बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र जयसिंह की सुसाइड मामले में प्रशासन पर सवाल उठा दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक छात्र का बैक पेपर क्लियर न होने की वजह से उसे दो बार प्लेसमेंट में शामिल होने का मौका नहीं मिला। साथ ही उसका बैक पेपर अभी भी क्लियर नहीं हुआ था। इस कारण हताश होकर उसने जान दे दी।

आईआईटी में एक बार फिर आत्महत्या की घटना ने संस्थान की काउंसलिंग और छात्र सहयोग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीटेक छात्र जयसिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वह पढ़ाई के दबाव में था। 
 

संस्थान प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जयसिंह की एकेडमिक रिपोर्ट तलब की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अकादमिक तनाव, ईयर बैक की आशंका या अन्य कारण इस दुखद कदम के पीछे तो नहीं थे।
 

जानकारी के अनुसार, जयसिंह ने वर्ष 2020 में बीटेक के बायोलॉजिकल सांइसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में दाखिला लिया था। चार साल का कोर्स 2024 में पूरा हो जाना चाहिए था। 
 

सूत्रों का कहना है कि कुछ विषयों में उसकी स्थिति कमजोर चल रही थी और ईयर बैक लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, संस्थान प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस और प्रशासन दोनों ही एकेडमिक और मानसिक पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं।
 

वर्ष 2025 में आईआईटी कानपुर में यह चौथी मौत है। इससे पहले दो छात्र और एक सॉफ्टवेयर डेवलपर आत्महत्या कर चुके हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संस्थान की काउंसलिंग व्यवस्था वास्तव में जरूरतमंद छात्रों तक पहुंच पा रही है।
 

बीते 22 महीनों में संस्थान में सात आत्महत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अक्तूबर 2025 में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र धीरज सैनी ने भी आत्महत्या की थी।
 

आईआईटी कानपुर के डीन ऑफ एकेडमिक्स अफेयर्स प्रो. अशोक डे ने कहा कि निदेशक के मेल के माध्यम से घटना की जानकारी मिली है। छात्र के एकेडमिक्स की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अभी इस संबंध में कुछ कहा नहीं जा सकता।
 

आईआईटी प्रशासन का दावा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संस्थान में नौ प्रोफेशनल काउंसलर नियुक्त हैं जिनमें मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक दोनों शामिल हैं। यह 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। 
 
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इसके साथ ही 24 घंटे चलने वाली ऑनलाइन हेल्पलाइन, प्रीवेंशन ऑफ इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण, डी-एडिक्शन क्लीनिक और हर 30 स्नातक छात्रों पर एक फैकल्टी एडवाइजर की व्यवस्था की गई है।
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