कानपुर। आयकर विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का उपयोग कर बीते दो सालों में देश भर में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलाया किया है। आयकर विभाग कानपुर की ओर से मर्चेंट चैंबर सभागार में प्रारंभ 2026 आउटरीच कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी, विधि) के सदस्य प्रसेनजीत सिंह ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
एआई आधारित विश्लेषण से विभाग डाटा एनालिटिक्स के जरिए करदाताओं की आय, खर्च और निवेश के बीच असंतुलन पहचान रहा है। इससे वित्तीय गतिविधियों का मिलान कर संदिग्ध मामलों को चिह्नित किया जा रहा है। कर चोरी के नए पैटर्न भी उजागर हो रहे हैं। इस सख्ती के कारण करीब 1.11 करोड़ लोगों ने अपने आयकर रिटर्न को संशोधित या अपडेट किया है। इससे राजस्व में वृद्धि हुई है। एआई के बढ़ते उपयोग से कर संग्रह बढ़ेगा और कर व्यवस्था में पारदर्शिता मजबूत होगी।
उन्होंने बताया कि एआई आधारित विश्लेषण से विभाग अब डाटा एनालिटिक्स के जरिए करदाताओं की आय, खर्च और निवेश के बीच असंतुलन को तेजी से पहचान रहा है। इसका लक्ष्य 63,000 से अधिक ऐसे रेस्तरां, कैफे और खाद्य कारोबारी हैं जिन पर कारोबार छिपाने का संदेह है। इन्हें नोटिस भेजकर गलतियों को सुधारने के लिए कहा गया है। एक अप्रैल से लागू नया आयकर कानून पहले की तुलना में अधिक सरल और संक्षिप्त है। इसमें शब्दों, नियमों और फॉर्म की संख्या काफी कम की गई है, जिससे करदाता और विभाग के संबंध मजबूत होंगे।
ये रहे मौजूद
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करन, महानिदेशक (जांच), लखनऊ, अजय कुमार अत्री, प्रधान आयकर आयुक्त शिवदान सिंह भदौरिया, संयुक्त आयुक्त आशीष चंद्र, रेणुका जैन, सुनीता सिंह, राघवेंद्र सिंह, सुरेश वर्मा, पंकज कुमार के अलावा बीके लाहोटी, दुर्गेश शुक्ल, शुभी मिश्रा, राजीव मेहरोत्रा, प्रदीप द्विवेदी, अखिलेश तिवारी, शरद प्रकाश अग्रवाल, अरविंद शुक्ला, केके शुक्ला आदि थे।