शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी कानपुर के सरताज खान की जिंदगी से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म के मुख्य कलाकार ऋषि कपूर हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त लड़के के पिता का रोल कर रहे हैं। फिल्म 'मुल्क' में ऋषि कपूर हूबहू सरताज की तरह डायलॉग बोलते नजर आ रहे हैं। फिल्म के डायलॉग- 'मेरे मुल्क के लिए मेरा प्यार साबित करो' और 'मेरे घर में मेरा स्वागत करने का हक उन्हें किसने दिया', ‘हम भारतीय हैं, हमारा जन्म भारत में हुआ है, हमारे पूर्वजों का भी जन्म भारत में ही हुआ था’ काफी मशहूर हो रहे हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- आतंक का कोई मजहब नहीं....
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सरताज और फिल्म के एक सीन में ऋषि कपूर
08 मार्च 2017 को लखनऊ के ठाकुरगंज में मारे गए आतंकी समूह के सदस्य सैफुल्ला के पिता सरताज ने मीडिया काे बयान दिया था कि जाे देश का नहीं हाे सकता वाे मेरा बेटा क्या हाेगा? उन्होंने सैफुल्ला का शरीर लेने अाैर उसका अंतिम संस्कार करने से भी साफ मना कर दिया था। कानपुर के जाजमऊ में रहने वाले सरताज ने पिछले साल यह भी कहा था कि 'आतंक का कोई मजहब नहीं होता। बच्चे क्या जानें कि देश की आजादी में हमारे पुरखों ने क्या कुर्बानियां दी हैं। ये उन्हें सिखाना बहुत जरूरी है।जिस बेटे को पाल पोस कर इस लिए बड़ा किया था कि वह आगे चलकर परिवार और देश का नाम रोशन करेगा। लेकिन वही बेटा देश का दुश्मन बन बैठा। अपने ही देश को तबाह करने के लिए उसने साजिशें शुरू कर दीं। आज उसी बेटे का बाप लोगों से ये कहता फिर रहा है कि जो देश का दुश्मन है वो मेरा बेटा कभी नहीं हो सकता। '
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फिल्म के एक सीन में ऋषि कपूर
माता-पिता अपने बच्चों पर सख्त नजर रखें। खासतौर पर देखें कि वह किसके संपर्क में है, किससे बात कर रहे हैं। धर्म मजहब छोड़कर सबको आतंक के खिलाफ खड़ा होना होगा। कोई अपना भी इसमें शामिल पाया जाए तो उसके खिलाफ भी लड़ें। बाप होने के नाते कौन पिता नहीं चाहेगा कि वह अनहोनी होने पर अपने बेटे का अंतिम संस्कार भी न करे। लेकिन मेरे घर में आतंकवादी के लिए कोई स्थान नहीं है। पूरा परिवार मेरे इस फैसले के साथ है। मेरा बेटा न तो पढ़ाई करता था न ही कोई काम धंधा। इसलिए उसे डांट पीटकर ढाई महीने पहले घर से निकाल दिया था। घर छोड़ने के बाद वह मुंबई चला गया और वहीं किसी के बहकावे में आ गया। मैं और मेरा बड़ा बेटा खालिद एक चमड़े की फैक्ट्री में काम करते हैं। दूसरे नंबर का बेटा वालिद चाय बेचता है। हमारा पूरा परिवार मेहनत करके अपना पेट पालता है। बेटे को देशद्रोही कहने के सवाल पर सरताज ने कहा था कि अगर मेरा मालिक और बाकी लोग मुझे आतंकवादी का बाप कहेंगे और काम नहीं देंगे तो मैं क्या करूंगा? कहां जाऊंगा? हम किस-किस को जवाब देंगे। पता नहीं क्या हुआ? कहां से उसके दिमाग में यह सब घर कर गया? सारी गड़बड़ दो-ढाई महीने में हुई है। हमें उतना ही पता है, जो बताया गया। मौत से एक दिन पहले उसका फोन आया था। कह रहा था कि मेरा वीजा बन गया है। जल्द ही मैं सउदी जा रहा हूं। मुझे भी ये जानना चाहिए था कि वह किसके साथ दुबई जा रहा है।
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'मुल्क' फिल्म की खास बात यह है कि इसके हर किरदार को बहुत ही खूबसूरती के गढ़ा गया है
सरताज की सोच उन लोगों के लिए सबक होनी चाहिए जो थोड़े से लालच के लिए ईमान बेचने से बाज नहीं आते। आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंककारी और उनको पनाह देने वाले पकड़े जाते हैं। इस्लाम का दहशतगर्दी से कोई वास्ता नहीं है। सरताज के बयान देश को टुकड़ों में बांटने का मंसूबा रखने वालों के गाल पर जोरदार तमाचे की तरह है, जिसकी गूंज सालों तक उन्हें सुनाई देगी।सरताज कहते हैं कि मैंने अपना बेटा खोया, लेकिन आंख में आंसू तक नहीं हैं। अब सिर्फ एक गुजारिश करना चाहता हूं कि मेरी ऊपर बीती इस घटना से दूसरे मां-बाप सबक लें और आतंकवाद के खिलाफ खड़े हो जाएं।
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सरताज ने बेटे की लाश भी नहीं देखी न ही उसका अंतिम संस्कार किया था
राइटर और डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने 'मुल्क' फिल्म को सच्ची घटना से प्रेरित बताया है और ट्रेलर में इसका जिक्र भी किया है लेकिन फिल्म निर्माण कंपनी ने कानपुर (जाजमऊ) के सैफुल्ला या उसके पिता सरताज के जीवन पर कहानी पर आधारित होने की पुष्टि नहीं की है। पहले कुछ लोग मान रहे थे कि फिल्म की पृष्ठभूमि में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले को लिया गया है। लेकिन ट्रेलर के बाद जानकार कह रहे हैं कि फिल्म लखनऊ के एक रिहायशी इलाके में हुए सैफुल्ला एनकाउंटर की कहानी के तार लेकर रची गई है। फिल्म की शूटिंग पिछले साल लखनऊ और वाराणसी में हुई थी। फिल्म में मुराद अली मोहम्मद के रोल में अभिनेता ऋषि कपूर, शाहिद मोहम्मद के रोल में प्रतीक बब्बर, दानिश जावेद के रोल में रजत कपूर, आरती मल्होत्रा के रोल में तापसी पन्नू, संतोष आनंद के रोल में आशुतोष राणा दिखाई देंगे।
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सरताज
08 मार्च 2017 को लखनऊ एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्ला के पिता सरताज ने बेटे का शव लेने से मना कर दिया था और ये बात कहकर सबको चौंका दिया कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। देशद्रोही के साथ ऐसा ही होना चाहिए। कानपुर के जाजमऊ इलाके का रहने वाला सैफुल्ला धर्मस्थलों पर धमाका करने की साजिश रच रहा था। कानपुर के मनोहर नगर, जाजमऊ इलाके में 1995 में सैफुल्ला का जन्म हुआ था। सैफुल्ला बचपन से ही पढ़ने में तेज था। उसके पिता सरताज चमड़े का छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं। सैफुल्ला के दो भाई खालिद और मुजाहिद हैं एक बहन बहन भी है। चार भाई बहनों में सैफुल्ला तीसरे नंबर का था।
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सरताज
सैफुल्ला के पिता सरताज के छह भाई हैं। जिनमें नूर अहमद, ममनून, सरताज, और मंसूर मनोहर नगर वाले घर में रहते हैं और दो बाकी दो भाई नसीम और इकबाल तिवारीपुर वाले मकान में रहते हैं। सैफुल्ला बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के संपर्क में आने के बाद उसने अपने घर में बम बनाने के तरीके सीखे थे। आमतौर पर शांत रहने वाला सैफुल्ला कभी-कभी ऐसा बन जाता था कि जैसे वह शैतान हो। उसके मोहल्ले के दोस्तों ने बताया कि पांच साल पहले सैफुल्ला का एक लड़की को लेकर इलाके में ही विवाद हो गया था जिसके बाद उसने असलहों से हवाई फायरिंग भी की थी। किरदार
'मुल्क' फिल्म की खास बात यह है कि इसके हर किरदार को बहुत ही खूबसूरती के गढ़ा गया है। वहीं इन किरदारों ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया भी है। मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू (तापसी पन्नू) से लेकर मुस्लिम आतंकवादी की जांच करने वाले ऑफिसर दानिश जावेद (रजत कपूर) तक के हर एक किरदार को परदे पर बड़े ही शानदार तरीके के पेश किया गया है। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- घर से मिला था आईएसआईएस का झंडा...
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सैफुल्ला
सैफुल्ला के घर से पुलिस को आईएसआईएस का झंडा और बम बनाने के आइटम के साथ हिन्दुस्तान का नक्शा भी मिला है। एनकाउंटर में सैफुल्ला की मौत के बाद उसके पिता सरताज ने घटना पर अफसोस जताते हुए कहा था कि जो देश के खिलाफ हम उसके खिलाफ हैं। सरताज ने बेटे की लाश भी नहीं देखी न ही उसका अंतिम संस्कार किया था। सरताज के इस फैसले की पूरे देश और संसद तक में तारीफ हुई थी। फिल्म की कहानी
चूंकी बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्में भारत-पाकिस्तान विवाद या किसी दंगे पर आधारित होती हैं। लेकिन फिल्म 'मुल्क' के साथ ऐसा नहीं है। इसकी कहानी असल में एक मुस्लिम परिवार के खोये सम्मान पर आधारित है, जिसे घर के आतंकवादी बेटे (प्रतीक बब्बर) की वजह से अपने मोहल्ले और समाज में बदनाम होना पड़ता है।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- शाहिद (प्रतीक बब्बर) और मुराद अली (ऋषि कपूर) की फिल्मी कहानी...
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'मुल्क' फिल्म के एक सीन में ऋषि कपूर
‘मुल्क’ फिल्म में ऋषि कपूर (मुराद अली) पेशे से वकील बने हैं। प्रतीक बब्बर उनके बेटे शाहिद की भूमिका निभा रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रतीक बब्बर का रोल सैफुल्ला की जिंदगी से प्रेरित है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है। फिल्म में ऋषि कपूर एक ऐसे बाप का रोल निभा रहे हैं जिसका बेटा आतंकी गतिविधियों में शामिल था। मुराद अली मोहम्मद अपने बेटे की डेड बॉडी लेने से इंकार कर देता है। फिल्म के डायलॉग्स
'मेरे मुल्क के लिए मेरा प्यार साबित करो' और 'मेरे घर में मेरा स्वागत करने का हक उन्हें किसने दिया', मुल्क की कहानी के अलावा फिल्म के ऐसे जबरदस्त डायलग्स भी दर्शकों के दिलों को जीतने में कामयाब होंगे। फिल्म में आशुतोष राणा के डायलॉग भी काफी दमदार हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- फिल्म के मशहूर डायलॉग...
अपने धर्म के चलते उसे कई ट्रायल से गुजरना पड़ता है। ट्रेलर का डॉयलॉग- ‘हम भारतीय हैं, हमारा जन्म भारत में हुआ है, हमारे पूर्वजों का भी जन्म भारत में ही हुआ था।’ काफी मशहूर हुआ है। फिल्म में भावुक उतार-चढ़ाव वाले दृश्य भी हैं जिसमें सरताज को उनके पड़ोसी पाकिस्तान और आतंकी ओसामा बिन लादेन का समर्थक बताने लगते हैं। उनके घर पर पत्थर फेंके जाते हैं। तब तापसी पन्नू के जरिए से ऋषि कपूर अदालत में इस समाज के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं।
तापसी पन्नू
अब तक तापसी को हम सभी ने किसी ग्लैमरस (जुड़वा 2), रॉव एजेंट (नाम शबना) या फिर घर में रहने वाली एक इंडिपेंडेंट लड़की (पिंक) के किरदार में देखा है। इस फिल्म में वह घर की बहू के साथ वकील की भूमिका में भी नजर आईं। वकील के तौर पर तापसी को देखने दिलचस्प है। तापसी ने अपने वकील वाले किरदार को काफी खूबसूरती से निभाया है। असली आतंकवाद की परिभाषा
फिल्म 'मुल्क' देखने के दौरान हिंदू-मुस्लिम,देशद्रोह और जिहाद जैसी भारी शब्द भी सुनने को मिलते हैं। चूंकि फिल्म हिंदू-मुस्लिम जैसे गंभीर विषय पर आधारित है तो इसलिए फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक आपको सेक्युलरिजम का पाठ भी पढ़ाती है। फिल्म के आखिरी में जज के तौर पर नजर आते एक्टर कुमुद मिश्रा भी जिहाद और आतंकवाद के परिभाषा को बताने में कामयाब रहते हैं।