कानपुर। पूरे दिन अपनी जिम्मेदारियों को निभाने वाली महिला अधिकारियों, डॉक्टरों व पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को परंपराओं को निभाते हुए करवाचौथ का व्रत रखा। किसी ने पूरे दिन शहर की कानून व्यवस्थाओं में सुधारा का प्रयास किया तो किसी ने ऑपरेशन थियेटर में दूसरों को जीवन दान दिया। इसके साथ ही कई मोर्चों पर यह अधिकारी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाती नजर आईं। ड्यूटी पूरी करने के बाद इन महिलाओं ने शाम को पूजन और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला।
काम के साथ रीतियों को निभाना अलग अनुभव
अपरश्रमायुक्त सौम्या पांडेय ने करवाचौथ का व्रत रख अपने पति की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। वह शादी के बाद से अपने काम के साथ सभी परंपराओं को भी निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि हमारे रीति रिवाज हमें हमारी संस्कृति से जोड़े रखते हैं। इनके साथ ही हम हमारे कर्तव्य और जिम्मेदारियों को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। इसलिए दोनों में संतुलन बनाना जरूरी है। अपने काम के साथ अपनी रीतियों को निभाने का एक अलग और सुखद अनुभव होता है।
मरीजों को देखने के साथ की पांच सर्जरी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता पिछले 21 वर्षों से करवाचौथ का व्रत रख रही हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी के साथ परंपरा निभाई। शुक्रवार को उनकी ओटी का दिन रहा तो उन्होंने सुबह अस्पताल आने के बाद तमाम रोगी देखे और ऑपरेशन थियेटर में पांच सर्जरी की। शाम के समय वह घर पहुंची और विधि विधान से पूजा अर्चना की। चांद निकलते के बाद पति के हाथों पानी ग्रहण किया। डॉ. रेनू ने बताया कि कई बार तो ऐसा भी हुआ है जब चांद निकलने के थोड़ी ही देर पहले अस्पताल से फोन आ गया कि किसी रोगी की आपात स्थिति में सर्जरी करनी है। ऐसे में पहले कर्तव्य पथ को चुनना पड़ा।
जिम्मेदारी के साथ परंपरा निभाना भी जरूरी
परिवहन विभाग में आरआई के पद पर तैनात आकांक्षा सिंह पिछले पांच सालों से व्रत रख रही हैं। अपने काम के साथ वह परंपराओं को निभाने में कभी पीछे नहीं हटती हैं। शुक्रवार को भी उन्होंने करवाचौथ का व्रत रखा। पूर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर उन्होंने पति संग व्रत खोला। आकांक्षा सिंह ने बताया कि काम तो हमारी जिम्मेदारी है लेकिन इसके साथ ही परंपराओं को भी निभाना जरूरी है। मैनें अपने घर पर मां को हमेशा यह परंपराएं निभाते देखा और मुझे भी वहीं से सीख मिली। इसी तरह मैं भी अपने काम के साथ रिवाजों का मान रखूंगी। इससे हमारी आने वाली पीढि़यां भी इस ओर अग्रसर होंगी।