कानपुर। अब एंजियोग्राफी की तरह पैर की नस से स्टंट डालकर दिमाग की नस में जमा खून का थक्का आसानी से हटाया जा सकता है। यदि दिमाग की कोई नस फट गई है तो उसे जोड़ा भी जा सकता है। यह जानकारी शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई एनएसआई-बीओई एंडोवैस्कुलर कार्यशाला में चिकित्सा विशेषज्ञों ने दी। देश भर के अलग अलग हिस्सों से आए सर्जनों को इस तरह के ऑपरेशन करने की अत्याधुनिक तकनीक सिखाई।
मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई में न्यूरोलॉजिकल एवं न्यूरोवैस्कुलर रोगों के उपचार में आधुनिक एंडोवैस्कुलर तकनीकों के प्रशिक्षण और कौशल विकास बढ़ावा के लिए ‘एनएसआई-बीओई एंडोवैस्कुलर कार्यशाला’ शुरु हुई। यह न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआई) के बोर्ड ऑफ एजुकेशन (बीओई) की तरफ से आयोजित की जा रही है। विभिन्न राज्यों के न्यूरोसर्जन, न्यूरोइंटरवेंशन विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोरेडियोलॉजिस्ट, रेजिडेंट चिकित्सक और प्रशिक्षु चिकित्सक शामिल हुए। एनएसआई के कोआर्डिनेटर डॉ.अनंत, जीबी पंत अस्पताल नई दिल्ली की डॉ. अनीता जगेटिया, यूसीएमएस-जीटीबी अस्पताल नई दिल्ली की डॉ. श्रुति गुप्ता, जीएसवीएम मेडिकल की उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि, पूर्व प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार, डॉ. आईएन वाजपेयी, आयोजन सचिव डॉ. आंचल दत्ता आदि शामिल रहीं।
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न्यूरो सर्जरी में एडवांस तकनीक बताई
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की रक्तवाहिनियों से जुड़े रोगों के सूक्ष्म छिद्र आधारित उपचार, नवीनतम एंडोवैस्कुलर तकनीक, अत्याधुनिक उपकरणों और जटिल न्यूरो वैस्कुलर रोगों के इलाज की जानकारी दी गई। उन्हें एंजियोग्राफी, कैथ लैब की कार्यप्रणाली, विकिरण सुरक्षा, कैरोटिड स्टेंटिंग, स्ट्रोक थ्रोम्बेक्टॉमी, फ्लो डायवर्जन तकनीक, विफल थ्रोम्बेक्टॉमी में रेस्क्यू रणनीति और ऑपरेशन पूर्व ट्यूमर एम्बोलाइजेशन की जानकारी दी गई।
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मोबाइल दे रहा गर्दन में दर्द
कानपुर। आरएमएलआईएमएस लखनऊ के डॉ. दीपक कुमार सिंह ने बताया कि मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल गर्दन दर्द दे रहा है। घंटों गलत पॉश्चर में बैठकर काम करने से कमर दर्द की तकलीफ बढ़ी है। उन्होंने बताया कि बचपन में ही पौष्टिक भोजन के बजाय फास्टफूड का चलन बढ़ गया है। इससे मोटापे के साथ कई बीमारियां हो रही हैं।
ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में 25-30 फीसदी युवा
कानपुर। निमहैन्स बेंगलुरु के डॉ. तेजस राव ने बताया कि तनाव, बीपी, शुगर से युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। न्यूरोलॉजिस्ट के पास पहुंच रहे रोगियों में से 25-30 फीसदी युवा हैं। इसकी वजह तनाव, बीपी, शुगर, धूम्रपान आदि हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, दिनचर्या में सुधार करना चाहिए।
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फास्ट का रखें ध्यान
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को जल्दी पहचानने के लिए फास्ट (एफएएसटी) बहुत ही सरल और असरदार तरीका है। इसमें एफ (चेहरा), ए (हाथ),एस (बोलना) और टी (समय) का ध्यान रखा जाता है। चेहरा टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी, बोलने की शक्ति कम होना ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हैं।