केस-1
विजय नगर के मकान नंबर 110/5 में रहने वाली रजनी और सोनी कई साल से वृद्धावस्था पेंशन ले रही हैं। पेंशन सूची में दोनों की उम्र 67 साल। भौतिक सत्यापन में उम्र निकली 20 और 24 साल।
केस-2
6/12 न्यू लेबर कॉलोनी निवासी घनश्याम को भी पेंशन दी जा रही है। सत्यापन में पता चला कि वह तो यहां रहते ही नहीं। यह पता तो सरिता श्रीवास्तव का है।
यह दो मामले तो बानगी भर हैं। डीएम के आदेश पर ग्रामीण और शहरी इलाकों की पेंशन सूची के सत्यापन में पता चला है कि वृद्धावस्था पेंशन में बड़े पैमाने पर गोलमाल हो रहा है। लेखपाल और कानूनगो की मिलीभगत से दो हजार से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम पर पेंशन निकल रही है जिनका बरसों पहले निधन हो चुका है। यहीं नहीं कई ऐसी महिलाएं भी पेंशन पा रही हैं जिनकी उम्र 30 साल भी नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक जनवरी, 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. हरिओम को वृद्धावस्था पेंशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इस पर उन्होंने ब्लाकों के बीडीओ और सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताओं को पेंशन सूची सत्यापित करने का आदेश दिया था। सत्यापन की रिपोर्ट 2 अप्रैल आई है। इसमें शिकायतें सही मिलीं। विजय नगर, काकादेव, पनकी, शास्त्री नगर, सेवाग्राम दादा नगर, मतइयापुरवा, अंबेडकर नगर, कच्ची बस्ती काकादेव और संजय नगर में रहने वाले 173 वृद्धावस्था पेंशन धारकों में से 113 अपात्र पाए गए। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में रहने वाले करीब 500 मृतकोें के नाम से भी पेंशन दिए जाने की रिपोर्ट मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों के 10 विकास खंडों की सूची सत्यापन से पता चला है कि पिछले एक साल से 1500 मृतकों के खाते में पेंशन जा रही है। कम उम्र, फर्जी पते पर रहने वालों के नाम से पेंशन जारी किए जाने के तथ्य भी उजागर हुए हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीसी उपाध्याय का कहना है कि अपात्रों का नाम सूची से बाहर किया जाएगा। अब तक जारी पेंशन की रिकवरी भी कराई जाएगी। नई पेंशन सूची तैयार कराई जाएगी। यह भी जांच की जाएगी कि किस स्तर से गड़बड़ी हुई।
इनसेट
77340 लोगों को दी जा रही जिले में वृद्धावस्था पेंशन
13.92 करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे इस मद में
1800 रुपये हर साल प्रति व्यक्ति दी जाती है पेंशन
कैसे बनती है पेंशन
वृद्धावस्था पेंशन का फार्म भरकर संबंधित तहसील में जमा करना पड़ता है। फिर लेखपाल, कानूनगो फार्म, उसमें लगे दस्तावेजों का सत्यापन करते हैं। उन्हीं की सहमति से उप जिलाधिकारी पेंशन दिए जाने की मंजूरी देता है। बाद में सत्यापित दस्तावेज समाज कल्याण विभाग जाता है, जहां से पेंशन सीधे खाते में भेजी जाती है।
पेंशन में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। इसीलिए वृद्धावस्था, विधवा, किसान और विकलांग पेंशन के सत्यापन के आदेश दिए गए हैं। कुछ सत्यापन रिपोर्ट आई हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट आनी हैं। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
एमपी अग्रवाल, जिलाधिकारी कानपुर नगर