कानपुर। भ्रष्टाचार पर चाबुक चलाने के लिए लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजकर अधिक अधिकार देने की मांग की है। इसमें दोषी के खिलाफ सर्च वारंट जारी करने और एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार भी शामिल हैं। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को लोकायुक्त ने अनुशासन में रहने की नसीहत भी दी है। लोकायुक्त शनिवार को कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन के हीरक जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आए थे।
श्री मेहरोत्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में लोकायुक्त व्यवस्था सुधारने के लिए उनसे सुझाव मांगे थे। उन्होंने कर्नाटक, केरल और मध्यप्रदेश के लोकायुक्त को प्राप्त अधिकारों और उत्तर प्रदेश में उनकी प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए ब्यौरा भेजा है। मुख्य रूप से सर्च वारंट जारी करने, एफआईआर दर्ज कराने समेत अन्य अधिकारों की मांग की है। अगर कुछ अधिकार बढ़ते हैं तो भ्रष्टाचार पर अधिक शिकंजा कसेगा। पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के संबंध में उन्होंने कहा श्री उपाध्याय अनुशासन की सीमा लांघ कर व्यक्तिगत आरोप लगाने लगे। हर किसी को अनुशासन के दायरे में रहना चाहिए। उसका पालन नहीं करने वाले को दंड के लिए भी तैयार रहना चाहिए।उपाध्याय जांच को ईर्ष्या से प्रेरित न मानें इसलिए उनका प्रकरण स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपने की सिफारिश की है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन, अयोध्या प्रसाद के खिलाफ परिजनों के नाम कीमती संपत्ति खरीदने के संबंध में लोकायुक्त ने कहा कि जांच के तहत दोनों आरोपियों के पुत्रों से पूछा कि उनके पास संपत्ति कहां से आई। अगर वेे सहयोग नहीं करते तो अन्य स्रोतों से जानकारी ली जाएगी। अन्य कानूनी कार्रवाई करने में संकोच नहीं बरता जाएगा। लोकायुक्त ने मंत्रियों और आला अधिकारियों के खिलाफ दर्जनों शिकायतों की पुष्टि की।
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उठा मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का मुद्दा
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद स्वरूप के खिलाफ दवाओं, उपकरणों की खरीद फरोख्त में घपला, नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी के संबंध में शिकायत मिलने को लोकायुक्त ने स्वीकारा। उन्होंने कहा, शिकायत में पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री लालजी वर्मा के खिलाफ भी आरोप थे। हालांकि शिकायतकर्ता ने श्री वर्मा के खिलाफ कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। यह भी कहा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने जांच में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। जांच पूरी होने से पहले उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इंकार किया।