फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘या हुसैन’ के नारे बुलंद कर उठे अलम के जुलूस

Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
Kanpur
विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर। पहली मोहर्रम को शुक्रवार रात मकबरा आगामीर से डेढ़ सौ साल पुराना नवाब हैदर अली खां के अलम का जुलूस निकला। इमाम बारगाह महल पटकापुर से नवाब दूल्हा के अलम का जुलूस उठा। जुलूसों में काले झंडे और अलम शामिल थे। लोग नंगे पैर नोहाख्वानी और मातम करते हुए चल रहे थे। रात को इमाम बारगाहों में मजलिस-ए-अजा बरपा हुईं। दोपहर को जामा मसजिदों में पेश इमामों ने तकरीर की। इसमें करबला के शहीदों के बारे में बताया गया। यजीद को दुनिया का पहला आतंकवादी बताया गया।
विज्ञापन

शाम को इमाम बारगाह महल पटकापुर से अलम का जुलूस उठा। विभिन्न मार्गों से होता हुआ जुलूस प्रयाग नारायण शिवाला पहुंचा। यहां इमामबाड़े से ताजिया लेकर लोग वापस पटकापुर को चल पड़े। यह जुलूस 134 सालों से उठाया जा रहा है। इस दौरान लोग काले कपड़े पहन नंगे पैर मातम करते रहे। जुलूस में नवाब मुमताज, इब्न-ए-हसन, फरहत हुसैन, हाजी नजरे हसन, हाजी मुंसिफ अली रिजवी, अख्तर सीतापुरी आदि मौजूद थे। देर रात मकबरा आगामीर ग्वालटोली से नवाब हैदर अली खां के अलम का जुलूस निकला।
यह जुलूस अंजुमन मोहम्मदी मोईनुल अजा के बैनर तले निकाला गया। जुलूस ग्वालटोली में गश्त करके मछली तिराहा होते हुए नवाब कंपाउंड पहुंचा। यह जुलूस 152 सालों से उठाया जा रहा है। इमाम बारगाहों और घरों में मजलिसों का आयोजन किया गया। मजलिसों को मौलाना तसव्वुर हुसैन, मौलाना बशीर हैदर, मौलाना जफर अब्बास, मौलाना मोहम्मद फजील, मौलाना मुनव्वर हुसैन, मौलाना शाकिर हुसैन ने संबोधित किया। यजीदी जुल्म सुनकर श्रद्धालु रो पड़े। मजलिसों में शहादतनामे, मीर अनीस, मिर्जा दबीर के मर्सिये पढ़े गए।
विज्ञापन

-----------------
दूसरी मोहर्रम को तब
...............
.2 अक्तूबर सन 680 था
.इमाम हुसैन का काफिला दोपहर को करबला पहुंच गया
.मक्का से करबला तक काफिला 37 स्थानों से गुजरा
.इमाम साहब ने खेमे लगवाने के पहले आसपास के लोगों को बुलाया
.करबला क्षेत्र की 41 वर्ग किमी की जमीन 60 हजार दरहम (अरब मुद्रा) में खरीदी
.इसे वक्फ कर जिम्मेदारी उन्हीं लोगों को सौंप दी
.लोगों के पूछने पर कि जमीन क्या करेंगे? इमाम साहब ने कहा ‘बाग’ लगवाएंगे
.काफिले में 180 ऊंट, 126 घोड़े शामिल थे
---------
‘शेर की आमद है कि रन कांप रहा है,
रन चीज है क्या चर्ख-ए-कोहन कांप रहा है।’
-मिर्जा दबीर
----------
पहला इमामबाड़ा बिठूर में बना था
कानपुर। नगर का पहला इमामबड़ा बिठूर में बना था। नवाब आसिफुद्दौला के सूबेदार अलमास अली खां ने इसे 215 साल पहले बनवाया था। इसी के साथ यहां मोहर्रम में ‘अजादारी’ की परंपरा शुरू हो गई। इसके बाद नवाब वाजिद अली शाह के वजीर नवाब मोतिमुद्दौला आगामीर ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें