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84 के दंगा पीड़िताें काे मिलेगा न्याय खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

Thu, 07 Dec 2017 01:21 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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1984 के सिख विरोधी दंगे सिखों के ख‌िलाफ थे। इन दंगो का कारण था इंदिरा गाँधी की हत्या जाे उन्हीं के अंगरक्षकों द्वारा की गई थी। जो की सिख थे। उसी के जवाब में ये दंगे हुए थे। इन दंगो में 3000 से ज्यादा मौतें हुई थी। दंगा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए एक बार फ‌िर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।
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कानपुर महानगर की श्रीगुरु सिंह सभा के चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह ने 84 के दंगा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जिरह की कमान दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरएस सोढ़ी को सौंपी है।

किन्हीं कारणों से जो दंगा पीड़ित हलफनामा नहीं भर सके हैं वे 7,8 व 9 दिसंबर को पूर्व एमएलसी के अशोक नगर स्थित आवास पर लगने वाले शिविर में सुबह 10 से शाम 4 बजे तक भर सकेंगे। सरदार कुलदीप सिंह का कहना है कि 23 दिसंबर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अस्थाई रूप से बंद हो जाएगा।
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इसलिए बंद होने से पहले पीड़ित परिवारों को हाईकोर्ट से न्याय मिल जाए यह प्रयास है। बताते चलें कि हाईकोर्ट ने 27 नवंबर को कहा था कि 1984 के सिख दंगे के जिन पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिला है, वह हाईकोर्ट में अर्जी दें, ताकि उनके प्रकरण पर विचार कर सरकार को आदेश दिया जा सके।


प्रदेश सरकार भी इस बात पर तैयार है कि यदि कोई पीड़ित अर्जी देता है तो उस पर विचार किया जाएगा। श्रीगुरु सिंह सभा कानपुर महानगर के चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति राजीव जोशी की पीठ ने यह आदेश दिया था।


इसी क्रम में पीड़ित परिवार अशोक नगर पहुंचे थे। कुलदीप सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेशानुसार उसी प्रारूप में 714 फाइलें दाखिल की गई हैं। इसका जवाब सरकार को 18 दिसंबर को देना है। उसी दिन न्यायालय अपना निर्णय देगा।


न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन भी दंगा पीड़ितों की फाइलें रह गई हैं वह भी अपना हलफनामा जमा करा दें। ताकि उन पर भी निर्णय हो सके। इसके लिए तीन दिवसीय शिविर 7 दिसंबर से शुरू होगा। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक चलेगा।
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