फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur News: सड़क निर्माण के टेंडर स्वीकृति से पहले एक फर्म को 56 लाख का भुगतान, जांच

विज्ञापन
विज्ञापन
डेरापुर(कानपुर देहात)। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के तहत मुगलरोड से बुधौली-रसधान-डेरापुर मार्ग निर्माण कराया जा रहा है। इसकी शासन से अक्तूबर माह में वित्तीय स्वीकृति मिली थी और बजट भी जारी किया गया था। विभाग को टेंडर कराना था, लेकिन विभाग से टेंडर स्वीकृत होने से पहले विभागीय पोर्टल पर एक फर्म को लाखाें रुपये का भुगतान किया जाना दिखने लगा। इस मामले में 56 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप लगा आईजीआरएस पर गोपनीय शिकायत की गई। इस पर विभाग के उच्चाधिकारियों ने जांच शुरू कराई है।
विज्ञापन

शासन ने एकमुश्त व्यवस्था योजना के अंतर्गत मुगलरोड से बुधौली-रसधान-डेरापुर 12.50 किमी मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 2466.77 लाख रुपये की अक्तूबर 2025 में वित्तीय स्वीकृति दी थी। वित्त समिति द्वारा निर्माण कार्य के लिए 583.07 लाख रुपये जारी भी किए। इस सड़क के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया कराई जानी थी। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड ने 25 नवंबर को टेंडर का प्रकाशन कराया और पांच दिसंबर को टेंडर खोला गया। इधर नवंबर माह में एक फर्म को इसी मद की धनराशि से करीब 56 लाख का भुगतान किए जाने का विवरण पोर्टल पर दिखने लगा। इस पर गलत तरह से भुगतान किए जाने का आरोप लगा विभाग में गोपनीय तरह से शिकायत की गई। वहीं कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी विभाग के उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। जिसमें बताया गया कि बिना टेंडर व अनुबंध होने से पहले भुगतान किया गया है। भुगतान की बात सामने आते ही उच्चाधिकारियों ने जांच के आदेश दिए। वहीं विभागीय जानकारो की माने तो किसी भी कार्य का टेंडर होने, बिना बांड भरे किसी भी तरह कार्यदायी संस्था व व्यक्ति को भुगतान नहीं किया जा सकता है। किसी भी मद से दूसरे कार्य के लिए किसी दूसरी फर्म को भुगतान नहीं किया जा सकता। इस मामले की जानकारी के बाद विभाग में खलबली मची हुई है।
-
बयान...
मैने दिसंबर माह में ही कार्यभार संभाला है। मामला नवंबर माह का है। पोर्टल पर 56 लाख की भुगतान धनराशि दिखने के बाद आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत हुई थी। शिकायतकर्ता सामने नहीं आया है। पूरे मामले की जांच निर्माण खंड-एक के अधिशासी अभियंता कर रहे हैं। जांच में सत्यता सामने आने के बाद ही स्थिति साफ होगी, भुगतान सही हुआ या गलत। - सुनील कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड, कानपुर देहात
विज्ञापन

-

मामला संज्ञान में आने पर मुझे जांच मिली थी, भुगतान हुआ है। भुगतान बाउचर व अन्य अभिलेखों के आधार पर जांच रिपोर्ट मुख्य अभियंता को भेजी गई है। जांच गोपनीय इसमें कुछ नहीं कहा जा सकता। उच्चाधिकारी ही मामले में निर्णय लेंगे। -हेमंत कुमार, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण खंड-एक
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें