बेहमई कांड में 43 साल भले ही बीत गए हो, लेकिन इस मुकदमे में 14 तारीख और फरवरी महीना अहम रहा। बुधवार को फैसला आया तो तारीख और महीने को लेकर लोगों की बीच चर्चा रही। 14 फरवरी 1981 को बेहमई में नरसंहार हुआ था। घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी। साथ ही इस घटनाक्रम पर बाद में फिल्म बनाई गई। मामले में एक आरोपी मान सिंह अभी तक फरार है।
पुलिस उसे नहीं ढूंढ पाई है। डीजीसी राजू पोरवाल ने बताया कि एंटी डकैती कोर्ट ने बेहमई कांड के आरोपी श्यामबाबू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि दूसरे आरोपी विश्वनाथ को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। वहीं, पूरे मामले की खास बात यह रही कि 14 फरवरी को ही यह हत्याकांड हुआ था। इसी तारीख में न्यायालय ने फैसला सुनाया।
घटना के बाद रिपोर्ट लिखाने में डर रहे थे गांव वाले
यमुना बीहड़ पट्टी में बसे गांव बेहमई के लोगों पर फूलन को शक था कि ये लोग ठाकुर बिरादरी के लालाराम व श्रीराम गिरोह को पनाह देते हैं। इस गिरोह से फूलन का गैंगवार चल रहा था। फूलन ने गांव के लोगों को कई बार चेतावनी दी थी कि अगर इन्हें पनाह (शरण) दी गई तो अच्छा नहीं होगा। बेहमई कांड हुआ तो गांव वाले डर गए। बाद में राजाराम ने हिम्मत दिखाकर मुकदमा दर्ज कराया।
कांड के बाद बनाई गई थी पुलिस चौकी
इस घटना से सरकार हिल गई थी। इसके बाद गांव के लोगों को सुरक्षा दी गई थी। लंबे समय तक पीएसी ने गांव कैंप किया था। इसके बाद गांव में पुलिस चौकी बना दी गई थी। ये चौकी भी संचालित है।
फूलन देवी ने की थी 20 लोगों की हत्या: बेहमई कांड पर 43 साल बाद आया फैसला, एक को उम्रकैद, एक बरी
बेहमई कांड का घटनाक्रम एक नजर में
- बेहमई कांड का घटनाक्रम एक नजर में14 फरवरी 1981 को नरसंहार
- 07 अप्रैल 1981 को पहली चार्जशीट
- 31 अक्तूबर को आठवीं चार्जशीट
- वर्ष 1994 में फूलनदेवी पेरोल पर रिहा
- 25 जुलाई 2001 को फूलन की हत्या
- वर्ष 2012 में सुनवाई के लिए मामला डीजीसी राजू पोरवाल को मिला
- वर्ष 2012 में ही पांच आरोपियों पर आरोप तय हुए।
- वर्ष 2014 में गवाहों की गवाही पूरी हुई।
- 14 फरवरी 2024 को फैसला आया।