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दुकानों के आवंटन में ईओ फंसे

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फर्रुखाबाद। कमालगंज नगर पंचायत की दुकानों के आवंटन व सोलर प्लांट लगवाने में घोटाले की अमर उजाला की खबर की प्रशासनिक जांच में पुष्टि हो गई है। इस मामले की जांच एडीएम ने नगर पंचायत के कार्यकारी अधिकारी(ईओ) केएन रावत को जांच में दोषी पाया गया है। उन पर कार्रवाई की अनुशंसा के साथ जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी जा चुकी है।
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नगर पंचायत कमालगंज के नलकूप संख्या एक व दो के पास बनी दस दुकानें अक्तूबर 2017 में ड्रा के जरिये आवंटित होनी थी। इन दुकानों के लिए 50 लोगों से 40-40 हजार रुपये की जमानत राशि नगर पंचायत के पास जमा कराई थी। इस तरह 20 लाख रुपये नगर पंचायत में जमा सिक्योरिटी राशि के रूप में जमा हुए। गड़बड़ी इसके बाद ही शुरू हुई। दुकान आवेदनकर्ताओं की इस सुरक्षा निधि के 40 लाख रुपयों में नगर पंचायत के खाते में आधे

रुपये जमा कर शेष रुपये कार्यकारी अधिकारी ने अपने पास ही रख लिए। वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा दुकानों की आवंटन प्रक्रिया के रद होने से हुआ। प्रकिया रद होने पर आवेदकों ने सिक्योरिटी के तौर पर जमा किए गए अपने धन की वापसी की मांग की। नगर पंचायत के खाते में रुपये न होने की वजह से आवेदकों को धन वापसी में समस्या हुई तो हंगामा हुआ।
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नगर पंचायत ईओ के इस कृत्य को गबन मानते हुए डीएम मोनिका रानी ने एडीएम गुलाब चंद्र को मामले की जांच सौंपी। जांच में घोटाला व वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुुई। एडीएम ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में पांच केवीए का सोलर प्लांट लगवाने में तय मानकों की अनदेखी का मामला खुला। मालूम हो कि नगर पंचायत में सोलर प्लांट 11.50 लाख रुपये में लगना था। इसके लिए तीन फर्मों से टेंडर लिए गए थे। 10 प्रतिशत जमानत राशि रोक कर


फर्म को भुगतान हिए जाने की शर्त थी, लेकिन नगर पंचायत में 12,1463 रुपये का सोलर प्लांट लगवाया गया। प्लांट लगाने वाली फर्म को 11,64091 रुपये का भुगतान चेक से कर दिया गया। नियमानुसार 10 फीसदी जमानत राशि भी नहीं काटी गई। जबकि पांच केवीए सोलर प्लांट नेडा विभाग से 7.25 लाख रुपये का मिलता


और बाजार से लगवाने पर 5.50 लाख रुपये में लगता। सोलर प्लांट लगवाने में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। यही नहीं नगर पंचायत में लगे सोलर प्लांट के भौतिक सत्यापन में पांच केवीए की जगह चार केवीए का पाया गया। इससे साबित हुआ कि इस मामले में जानबूझ कर सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाई गई है। वहीं दस दुकानों के आवंदन मेें आवेदकों से आए 20 लाख रुपयों को 19 नवंबर 2017 तक सरकारी खाते में जमा करने थे,


लेकिन सरकारी खाते में 19 अक्तूबर तक 32,2900 रुपये जमा किए गए। बकाया 16,77180 रुपये रोक लिए गए। यह धनराशि बाद में सरकारी खाते में जमा की गई। यह वित्तीय अनियमितता है। एडीएम गुलाब चंद्र ने जांच में सोलर प्लांट लगवाने में घोटाला होने और दुकान आवंटन में वित्तीय अनियमितता किए जाने की पुष्टि कर दी। जिसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

अमर उजाला ने इसी वर्ष 9 फरवरी को जमानत राशि न मिलने पर हंगामा शीर्षक से पेज संख्या तीन पर खबर प्रकाशित की थी। वहीं नगर पंचायत में सोलन प्लांट लगवाने में हुए घोटाले की खबर को अमर उजाला ने 20 फरवरी के अंक में पेज संख्या दो पर सोल प्लांट के भुगतान में खेल उजागर शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 22 फरवरी के अंक में पेज संख्या चार पर सोलर प्लांट घोटाले की खुलने लगीं परतें शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
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नगर पंचायत के ईओ पर कसा शिकंजा
- एडीएम की जांच में सोलर प्लांट व सिक्योरिटी मनी में गबन का मामला
- डीएम के पास पहुंची जांच रिपोर्ट, जल्द होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
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