अमर उजाला ब्यूरो
20 सितंबर
बांदा। बुंदेलखंड में मनाया जाने वाला परंपरागत महबुलिया पर्व बुधवार को खत्म हो गया। यह 15 दिवसीय था। जगह-जगह बालिकाओं के जत्थे गाजे-बाजे के साथ कांटों की झाड़ी पर सजे फूलों की महबुलिया लेकर उसे विसर्जित करने नदी-तालाब गईं।
बालिकाओं ने घर के आंगन या द्वार पर भूमि के टुकडे़ में सफाई के बाद गोबर से लिपाई की। रंग-बिरंगे सूखे रंगों से रंगोली सजाई। उसके बीच कांटों की झाड़ी लगाई। उसमें रंग-बिरंगे फूल पिरोए। परंपरागत- ‘महबुल दाई-महबुल दाई....’ गीत गाती हुईं नदी या तालाब पहुंचीं। कई जत्थों में बाजे-गाजे भी शामिल थे। पानी में विसर्जन के बाद मीठे पुआ, पंजीरी व मिष्ठान आदि प्रसाद के रूप में बांटे। शहर के नवाब टैंक, छाबी तालाब, कच्चा तालाब आदि में विसर्जन हुए।
बबेरू प्रतिनिधि के मुताबिक बालिकाओं ने आकर्षक महबुलिया सजाई और गीतों के बीच नदी-तालाब जाकर विसर्जन किया। यह परंपरागत सिलसिला पिछले 15 दिनों से चल रहा था। हर वर्ष पितर पक्ष में ही महबुलिया पखवारा मनाया जाता है।
-कांटोें में फूल सजाकर मनाई महबुलिया
-15 दिवसीय पर्व का विसर्जन से समापन
-कन्याओं के जत्थों ने सजाई महबुलिया