कानपुर देहात। हर गरीब को पक्की छत उपलब्ध कराने व आवास सूची में पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार ने आवास प्लस एप जारी किया है। इसके सत्यापन करने वाले अधिकारी लाभार्थी के घर जाएंगे और वहां से ऑनलाइन डाटा फीड करेंगे। इससे अपात्रों को लाभ नहीं मिलेगा, और पात्र लाभ से वंचित नहीं होंगे।
अभी तक आवास आवंटन वर्ष 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर बनाई गई सूची के हिसाब से हो रहा था। आर्थिक जनगणना के सात साल बीतने के बाद सूची में दर्ज काफी लोगों की स्थितियां वर्तमान में बदल गईं। लाभ लेने के पात्र नहीं रहे, लेकिन सूची में नाम होने की वजह से उन्हें योजना का लाभ मिल जाता है। सूची में नाम न दर्ज होने पर गरीब को आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस बिगड़ी व्यवस्था के बदलाव के लिए केंद्र सरकार ने नया निर्देश जारी किया है। डीएम राकेश कुमार सिंह ने आवास लाभार्थियों का सर्वे करने का निर्देश दिया है।
बीडीओ पंचायत सचिव के साथ गांवों में कैंप लगाकर पात्रों का चयन करेंगे, और ऑनलाइन फीडिंग करेंगे। इस व्यवस्था में अपात्रों को लाभ नहीं मिलेगा और अधिकारी मनमानी नहीं कर सकेंगे। यह जरूरी नहीं रहेगा कि आवास का लाभ पाने के लिए आर्थिक जनगणना 2011 की सूची में नाम दर्ज हो। पात्र लाभार्थी की आनलाइन फीडिंग के बाद डाटा ऑनलाइन नेट पर अपलोड कर दिया जाएगा। आवास का बजट ब्लाकों में पहुंच जाएगा तो फिर लाभार्थी के घर की जांच कराई जाएगी, यदि इस दौरान उसने मकान का निर्माण करा लिया है तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा। प्रधानमंत्री आवास योजन के तहत पात्र लाभार्थी के खाते में एक लाख 20 हजार रुपये की रकम तीन किश्तों में भेजी जाएगी। इसके अलावा 90 मानव दिवस पारिश्रमिक मनरेगा के तहत लाभार्थी को दिए जाएंगे। वहीं शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे।
आनलाइन सत्यापन के लिए सभी बीडीओ को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। 30 सितंबर तक यह कार्य हर हाल में पूरा किया जाना है।
शिवकुमार पांडेय, परियोजना निदेशक कानपुर देहात