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कानपुर देहात-02

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अमर उजाला ब्यूरो।
कानपुर देहात।
परिषदीय स्कूलों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए भले सरकार लाख दावे कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि मध्यान्ह भोजन योजना के लिए शिक्षकों को उधारी का सहारा लेना पड़ रहा। मिडडे मील बनाने के लिए अक्टूबर 2016 से लेकर मई 2017 तक का धन नहीं मिला है। शनिवार से फिर स्कूल खुल जाएंगे। इस पर जिले के शिक्षक चिंतित है कि एमडीएम अब कैसे बनवाया जाएगा।

परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सरकार मध्यान्ह भोजन योजना चला रही है। योजना के संचालन के लिए समय से धन नहीं मिल रहा है। जिससे योजना को संचालन में समस्या आ रही है। शिक्षक अपनी जेब से धन खर्च करे या फिर किसी दुकानदार से उधार सामान लेकर दोपहर का भोजन बनवा रहा है। जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह, कामता सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के धीरेंद्र सिंह आदि शिक्षकों ने बताया कि पिछले सत्र के अक्टूबर माह से कनवर्जन मनी नहीं मिली है।
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दुकानों में उधारी की हद हो गई है। अधिकारी एमडीएम बंद होने पर कार्रवाई की चेतावनी देते हैं। ऐसे में मजबूरी में व्यवस्था कर किसी तरह से एमडीएम का संचालन किया जाता है। स्थिति यह गई है कि दुकानदार भी उधारी देने से मना कर रहे हैं। शनिवार से स्कूल खुलने पर एमडीएम का संचालन करना मुश्किल काम होगा।


वहीं, सप्ताह में एक दिन फल व दूध भी वितरण किया जाना है। इसके लिए नकद धन खर्च करना पड़ता है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि अधिकारी शिक्षकों की इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वह केवल योजना संचालन करवाना चाहते हैं।
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बोले जिम्मेदार

जनवरी माह तक का धन शिक्षकों के खाते में भेज दिया गया है। केवल फरवरी से 20 मई तक का भुगतान बाकी है। इसके लिए बजट आ गया है, वह भी जल्द ही खातों में भेज दिया जाएगा।

- दीपा शुक्ला, जिला समन्वयक (मध्याह्न भोजन)



उधार लेकर बनवाया एमडीएम, उधारी झेल रहे शिक्षक

- शिक्षक बोले, अक्टूबर से नहीं मिला धन
- कैसे हो मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन
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