घाटमपुर। राष्ट्रीय हरित अभिकरण के आदेशों का उलंघन करके किसान खेतों में ही फसलों के अवशेष (पराली) जला रहे हैं। पर्यावरण को क्षति होने के साथ ही उपजाऊ कृषि भूमि की सेहत बिगड़ रही है। यमुनापट्टी (तिरहर) समेत इलाके के अन्य गावों में किसान फसलों के अवशेष जला रहे हैं।
राष्ट्रीय हरित अभिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक खेतों में फसलों के अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण, धुआं, कोहरा (स्माग) पैदा होता है जो जन स्वास्थ्य के लिए घातक है। वहीं, अक्सर अग्निकांड जैसी घटनाएं होती रहती हैं। बीते एक पखवारे के दौरान रेउना, गड़ाथा, अमिरतेपुर, बौहार, नौरंगा, सजेती, बेंदा, उमरी, साढ़ और अमौर समेत कई गांवों में खेतों में जलाए गए फसलों के अवशेषों से आग लगने की घटनाएं होते बचीं।
इधर, कृषि और मृदा परीक्षण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक खेतों में ज्वार, बाजरा, तिली, उड़द, मक्का, मूंग, अरहर, जौ, गन्ना और गेहूं जैसी फसलों के अवशेष डंठल और पत्तियां जलाए जाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और पीएच (कार्बन) की मात्रा घटती है।
कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि खेतों में फसलों के अवशेष जलाने से मिट्टी के उपजाऊ परत के नीचे पलने वाले कृषि मित्र कीट केंचुआ आदि नष्ट होते हैं। जबकि, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जाने से फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ता है।
अवशेष जलाने वालों को नोटिस जारी करेंगे
घाटमपुर। एसडीएम राहुल कश्यप विश्वकर्मा ने बताया कि खेतों पर फसलों के अवशेष (पराली) जलाने पर रोक है। इसके बावजूद यदि कोई किसान आदेश के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नोटिस जारी कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए राजस्व लेखपालों से रिपोर्ट मांगी गई है।
फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने का प्राविधान
घाटमपुर। खेतों पर फसलों के अवशेष जलाए जाने पर जुर्माने और एफआईआर कराने के निर्देश हैं। जिसके तहत दो एकड़ कृषि क्षेत्रफल पर 2500 रुपये प्रति घटना, दो एकड़ से अधिक और पांच एकड़ से कम पर 5000 रुपये प्रति घटना और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर 15 हजार रुपये प्रति घटना जुर्माना (अर्थदंड) वसूलने के निर्देश हैं।