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शेयरों की खरीद-बिक्री में फंसे कानपुर के 100 निवेशक, उत्तर प्रदेश में 500 निवेशकों पर कसा है शिकंजा

Tue, 03 Nov 2020 10:01 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
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शेयर मार्केट
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शेयरों की मानकों के विपरीत खरीद-बिक्री में शहर के करीब 100 निवेशक फंसे हैं। इनमें कई बड़े कारोबारी और बिल्डर शामिल हैं। इन्होंने किसी खास कंपनी के शेयरों को ऊपर उठाने के लिए लगातार खरीद-बिक्री की। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इन पर भारी भरकम पेनाल्टी लगाई है। हालांकि इससे राहत देने के लिए सेटलमेंट योजना भी शुरू की है।
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सोमवार को 31 दिसंबर 2020 तक इसकी आखिरी तारीख बढ़ा दी गई है। दरअसल, एक अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच जिन निवेशकों ने बांबे स्टॉक एक्सचेंज से शेयरों को खरीदकर तत्काल बेच दिया, उन्हें सेबी ने प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस के तहत नोटिस जारी किया और पेनाल्टी लगाई। इसमें देश के 26,000, उत्तर प्रदेश के 500 और कानपुर के 100 निवेशक शामिल हैं।

पेनाल्टी के विरोध में निवेशकों ने ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल की कि शेयरों को खरीदकर तत्काल बेचना कोई गुनाह तो नहीं। बाद में यह मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल भी गया। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने सेबी को आदेश दिया कि सभी 26,000 खाताधारक अपील करेंगे तो सुनवाई कैसे होगी। लिहाजा कोई सेटलमेंट योजना लांच करें और मसला सुलझाएं।
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इस पर सेबी ने एक अगस्त 2020 को सेटलमेंट योजना लागू की जो 31 अक्तूबर तक प्रभावी थी। अभी तक इन 26,000 निवेशकों में हाय तौबा मची थी कि आखिरी तारीख न बढ़ी तो मुनाफे से कई गुना अधिक पेनाल्टी देनी पड़ेगी, मगर निवेशकों की मांग पर सेबी ने आखिरी तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ा दी। अब निवेशक पेनाल्टी तो भरेंगे लेकिन कुछ नियम और शर्तों के साथ उन्हें थोड़ी राहत दी गई है। 

मर्चेंट चैंबर ने किया था अनुरोध 
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की लीगल कमेटी के चेयरमैन आदेश टंडन ने सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी को ई-मेल करके सेटलमेंट योजना की आखिरी तारीख बढ़ाने का अनुरोध किया था। सीएस आदेश टंडन ने तर्क दिया था कि अनजाने में कुछ निवेशकों ने सौदे किए थे। उस पर टैक्स भी दिया था। निवेशक कानून के जानकार नहीं होते। बावजूद इसके सेबी ने हर निवेशक पर व्यक्तिगत तौर पर पेनाल्टी की रकम थोप दी है। उन्होंने अपील की कि तर्क संगत पेनाल्टी लगाकर मामले को खत्म किया जाए।

ब्रोकरों पर कोई कार्रवाई नहीं
शेयर ब्रोकर शेयर की खरीद बिक्री करवाने के बदले शुल्क या कमीशन लेता है। इसके बदले बिक्री के नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी भी ब्रोकर पर होती है। मगर इस मामले में शेयरों की खरीद बिक्री मानकों के विपरीत पाए जाने पर शेयर ब्रोकरों पर कार्रवाई नहीं की गई।
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