क्षेत्र के विशैनेपुरवा गांव में संक्रमण की चपेट में आने से करीब सौ से ज्यादा ग्रामीण बीमार हैं, जबकि एक छात्रा की मौत हो चुकी है। देर शाम को डाक्टरों की टीम गांव पहुंची आैर 133 मरीजों की स्लाइडें बनाईं हैं। मुख्य सचिव दीपक सिंघल के आदेश के बावजूद प्रधान गांव में सफाई नहीं करा रहा है। आलम यह है कि गांव विशैनेपुरवा में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। नालियों व सड़कों पर कीचड़ भरा हुआ है। इससे गांव में संक्रमण रोग फैला है।
करीब एक सैकड़ा लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। संक्रमण की चपेट में आने से गांव के दीवान सिंह की 10 वर्षीय पुत्री शांति की बुधवार को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने उसे तिर्वा मेडिकल कालेज में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में जाकर लोगों को दवा वितरण करने जहमत तक नहीं उठाई। इससे लोग झोलाछाप से इलाज कराने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
चिकित्साधीक्षक डा. जेपी सलोनिया ने बताया कि देर शाम टीम को गांव भेज दिया गया है। टीम ने 133 मरीजों को चिह्नित कर स्लाइडें बनाई हैं। इसमें छह लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल कालेज तिर्वा में भर्ती कराया गया है।