छिबरामऊ। पूर्व ब्लॉक प्रमुख के महाविद्यालयों के चारागाह की बेशकीमती जमीन पर बने होने की शिकायत की गई थी। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने इस जमीन को चारागाह में दर्ज करा दिया था। अब यह मामला मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच चुका है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख ने जांच कराकर एसडीएम के आदेश को निरस्त कर जमीन को विद्यालयों के नाम दर्ज कराने की मांग की है।
ग्राम असालत नगर और रामपुर बैजू स्थित दिवंगत बाबू सिंह बालिका महाविद्यालय, चौधरी बृजकिशोर सिंह विद्यालय व बाबू सिंह महाविद्यालय के विद्यालय भवन के चारागाह की जमीन पर बने होने की शिकायत एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी से की गई थी। राजस्व प्रशासन की जांच में इन विद्यालयों के भवन चकबंदी अभिलेखों में बतौर पशुचर (सुरक्षित श्रेणी) में दर्ज है, जबकि वर्तमान 1428-1433 फसली एवं खतौनी में यह विद्यालय प्रबंधक बृजकिशोर सिंह व सुरेंद्र सिंह के नाम दर्ज है।
जांच के बाद इन प्रविष्टियों के फर्जी व अनाधिकृत पाए जाने पर, जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने अभिलेख में संशोधन कराते हुए पशुचर के रूप में खतौनी में दर्ज करा दिया था। वहीं, एसडीएम के आदेश के खिलाफ पूर्व ब्लॉक प्रमुख बृजकिशोर सिंह यादव ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए बताया कि विद्यालयों की जमीन पूर्व में ऊसर में दर्ज थे। पट्टों के आधार पर इस जमीन का बैनामा कराने के साथ ही दाखिल खारिज कराया गया था। एसडीएम के आदेश को निरस्त करते हुए इस जमीन को पुनः ऊसर में दर्ज कराने साथ ही विद्यालयों के नाम खतौनी में दर्ज कराए जाने की मांग की। शिकायत पर प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को स्थलीय निरीक्षण कराकर समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए हैं।