कन्नौज। प्रदेश सरकार संस्कृत भाषा को समृद्ध करने की कवायद कर रही है। दूसरी ओर जिले के संस्कृत विद्यालय बदहाल हैं। यह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। जिले में संस्कृत के पांच विद्यालय हैं। इनमें पंजीकृत 668 छात्रों का भविष्य संवारने का जिम्मा दो शिक्षकों के हाथ में है। यहां आधुनिक सुविधाएं तो दूर मजबूत कमरे, पेयजल, शौचालय और पर्याप्त संख्या में शिक्षक तक नहीं हैं।
जिले में चार वित्तीय मान्यता प्राप्त और एक वित्तविहीन संस्कृत विद्यालय है। इनमें प्रथमा (कक्षा छह, सात व आठ) व पूर्व मध्यमा (कक्षा नौ व दस) और उत्तमा (स्नातक स्तर) की कक्षाएं संचालित होती हैं। मुकुंद संस्कृत महाविद्यालय कन्नौज में 120, लोमश ऋषि संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ऊंचा में 86, च्यवनाश्रम संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चियासर में 142, स्वामी प्रेमाश्रम संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तिर्वा में 310 छात्र पंजीकृत हैं। यह चारों वित्त पोषित हैं। राधा देवी आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरसहायगंज वित्तविहीन है। स्वामी प्रेमाश्रम संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य और एक सहायक अध्यापक है। तीन अन्य विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं है। चारों विद्यालयों में 668 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। स्वामी प्रेमाश्रम के प्रधानाचार्य अपने विद्यालय में शिक्षण कार्य देख रहे हैं। इसी विद्यालय के सहायक अध्यापक तीन अन्य विद्यालयों में शिक्षण कार्य देख रहे हैं। इन विद्यालयों में रिकार्ड के रखरखाव के लिए एक भी लिपिक नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं हैं।
कोरोना काल में नहीं हुई ऑनलाइन पढ़ाई
कोरोना काल में इन विद्यालयों में कागजों पर खानापूर्ति होती रही। एक दिन भी ऑनलाइन क्लास नहीं चली। पिछले सत्र में बिना कोर्स पूरा किए छात्र पास कर दिए गए। इस बार भी ऐसा ही रहा। सरकारी दावे किए गए कि ऑनलाइन क्लास चल रही हैं। किसी विद्यालय में कोई अध्यापक नहीं मिला। चारों संस्कृत विद्यालय कोरोना के कारण बंद हैं।
विद्यालयों में जगह पर्याप्त,भवन जर्जर
चारों संस्कृत विद्यालयों में जगह पर्याप्त है। इनके भवन जर्जर हो गए हैं। छात्रों के बैठनेे के लायक एक भी कक्ष नहीं है। यही हाल आफिस का है। विद्यालय से भी खराब स्थिति शौचालय की है। पेयजल की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
भवन सही कराने के लिए प्रबंधकों से कहा गया: डीआईओएस
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र बाबू ने बताया कि विद्यालयों के प्रबंधकों से भवन सही कराने के लिए कहा गया है। इन विद्यालयों में अध्यापकों की पहले से कमी है। दो विद्यालयों में संविदा पर अध्यापकों की जल्द नियुक्ति की जाएगी। कोरोना काल के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ है।