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एसएनसीयू की बढ़ेगी क्षमता, नवजातों की दिक्कतें होंगी कम

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एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। महिला विंग के एसएनसीयू (सिक एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) में नई रेडियंट वार्मर मशीन खरीद की कवायद तेज कर दी गई है। क्षमता बढ़ने से प्री मैच्योर नवजातों को सहूलियत होगी। प्री मैच्योर नवजातों की बढ़ती संख्या पर शासन ने गंभीरता दिखाई है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में मिशन निदेशक ने सीएमएस को रेडियंट वार्मर व फोटो थेरेपी मशीन के लिए बजट मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया है। बजट मुहैया होते ही मशीनों की खरीद की जाएगी। सितंबर माह में कई बार एसएनसीयू वार्ड में नवजात बच्चों की संख्या 19 तक पहुंच चुकी है। रेडियंट वार्मर मशीनों की संख्या कम होने से एक साथ दो-दो बच्चों को लिटाकर इलाज करना पड़ता है। इससे बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
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महिला विंग के एसएनसीयू वार्ड की 20 रेडियंट वार्मर की क्षमता है। मौजूदा समय में इनकी संख्या 10 है। इन दिनों प्री मैच्योर नवजातों क ी संख्या में इजाफा हो रहा है। इसको लेकर चिकित्सक परेशान हैं। बच्चे को भर्ती कराने आए तीमारदार रेफर करने के बावजूद इन्हें दूसरी जगह ले जाने को तैयार नहीं होते हैं। इससे समस्या गंभीर हो रही है। एक मशीन पर दो नवजातों के इलाज से इन्हें एक जैसा तापमान नहीं मिल पाता है। सितंबर माह में तीन नवजातों की मौत हो चुकी है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों की मौत इंफेक्शन की वजह से नहीं हुई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। यह अन्य बीमारियों से ग्रसित थे। इससे मौत हुई है। नवजातों की बढ़ती संख्या पर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हुआ है। इसके बाद एंटीबायोटिक दवा व मां के दूध का सेवन कर रहे बच्चों को कंगारू वार्ड में शिफ्ट किया गया। इससे एसएनसीयू का लोड काफी कम हुआ है।
भेजी गई मशीनों की गुणवत्ता थी खराब
करीब दो माह पहले शासन से खरीद कर कंपनी के माध्यम से 12 रेडियंट वार्मर व 6 फोटो थेरेपी मशीनों की आपूर्ति की गई थी। इनकी गुणवत्ता खराब थी। इससे इन्हें वापस कर दिया गया।
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आसपास जिलों से भी पहुंचते हैं नवजात
एसएनसीयू वार्ड में जिले के अलावा हरदोई, औरैया, मकनपुर, ठठिया, बेला, गुरसहायगंज सहित अन्य क्षेत्रों से भी बच्चे पहुंचते हैं।
सितंबर में 78 प्री मैच्योर नवजात हुए भर्ती
एसएनसीयू वार्ड के आंकड़ों के मुताबिक अस्पताल में 21 अगस्त से 20 सितंबर तक 78 बच्चे पैदा हुए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सुरेश यादव का कहना है कि प्री मैच्योर बच्चों की संख्या बढ़ने का कारण गर्भ के दौरान खान-पान में लापरवाही बरतना, डायबिटीज, बीपी बढ़ने की समस्या है। महिलाओं को गर्भ के दौरान खानपान का विशेष ख्याल रखना चाहिए। वहीं कई मामलों में कम उम्र में शादी होने की वजह भी सामने आई है।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग हुई है। इस दौरान एसएनसीयू के संसाधनों को लेकर चर्चा हुई। बताया गया कि रेडियंट वार्मर, फोटो थेरेपी मशीनें मुहैया कराई गई थीं। गुणवत्ता घटिया होने की वजह से इन्हें वापस भेज दिया गया। उपलब्ध मशीनें काफी कम हैं। इससे दिक्कत हो रही है। मिशन निदेशक पंकज कुमार ने कहा कि जल्द ही मशीनों को खरीदने के लिए बजट मुहैया करा दिया जाएगा। सीएमएस ने कहा कि बजट मिलते ही रेडियंट वार्मर व फोटो थेरेपी मशीनों की खरीद की जाएगी। इससे नवजातों को दिक्कतें कम होंगी। बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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