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नौकरी से निकाली गईं नर्सों का हंगामा

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सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी से वार्ता करतीं स्टाफ नर्सें। संवाद - फोटो : CHIBRAMAU
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छिबरामऊ/कन्नौज। नगर के सौ शैया अस्पताल से आठ पुरुष व दो महिला नर्स की सेवा समाप्ति का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को सीएमएस के कार्यालय में स्टाफ नर्सों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर वसूली के आरोप लगाए। सीएमएस और स्टाफ नर्सों के बीच झड़प हुई। नर्सें रो-रोकर नौकरी के लिए दिए गए रुपये वापस कराए जाने की मांग रहीं थीं। इसको लेकर अस्पताल परिसर में घंटों हंगामा चला।
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सौ शैया अस्पताल से सेवा समाप्त की गईं स्टाफ नर्सें गुरुवार को सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी के कार्यालय में पहुंच गईं। इनका कहना है कि वे लखनऊ में सेवा प्रदाता कंपनी में गईं थीं, जहां उनकी सेवाओं को सीएमएस की संस्तुति के बाद समाप्त करने की बात कह कर पत्र भी थमा दिया गया। हालांकि सीएमएस अपनी तरफ से ऐसी कोई संस्तुति नहीं किए जाने की बात कहते रहे। सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी का कहना है कि स्टाफ नर्सों की सेवा प्रदाता कंपनी अवनि परिधि एनर्जी एंड कंम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड ने सेवा समाप्त की है, इससे उनका कोई सरोकार नहीं है।
इधर, कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनसे नौकरी के नाम पर दो से ढाई लाख रुपये की वसूली अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से की गई है। अब जब उनकी नौकरी जा रही है तो उनके रुपये वापस कराए जाएं। इस दौरान दौरान सीएमएस और स्टाफ नर्सों के बीच तीखी झड़प हुई।
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ऐसे राजी हुईं नर्सें
स्टाफ नर्सों ने सीएमएस से कंपनी से वार्ता कर उनको अन्य किसी अस्पताल में सेवाएं देने के लिए पत्र लिखने की मांग की है। इस पर सीएमएस ने सहमति दे दी है। इसके बाद स्टाफ नर्सें लौट गईं।
दो पत्रों के बीच फंसा सेवा समाप्ति का मामला
सौ शैया अस्पताल में दस स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा समाप्ति का मामला अस्पताल प्रशासन की ओर से सेवा प्रदाता कंपनी को भेजे गए दो पत्रों से और भी अधिक फंस गया है। अस्पताल के सीएमएस ने 27 जनवरी 2022 को सेवा प्रदाता कंपनी को पत्र लिखा था, इसमें स्टाफ नर्स अंशु तिवारी, वंदना पाल, मोनिका यादव, प्रीती देवी, प्रियंका सिंह, पवन कुमार, प्रत्यूष त्रिपाठी, विवेक कुमार, ऑपरेशन थियेटर अटेंडेंट अंबुज दीक्षित व अनिल कुमार की सेवा समाप्त करने की संस्तुति की गई थी लेकिन जब कंपनी ने मानक के अनुसार सेवा समाप्त करने की बात कही तो 31 जनवरी को फिर दूसरा पत्र भेजा गया। इस पत्र में स्टाफ नर्स वीरेंद्र कुमार, प्रत्यूष त्रिपाठी, अनन्या, अंशु तिवारी, मोनिका यादव, विवेक कुमार, सोनाली यादव, प्रीती देवी, ओटी अटेंडेंट अंबुज दीक्षित व प्रवीण कुमार के नाम भेजे गए। इस संस्तुति के बाद इन स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा को समाप्त कर दिया गया। अब कर्मचारी इन्हीं दोनों पत्रों के आधार पर सीएमएस से जवाब मांग रहे हैं।
निरीक्षण करने नहीं जाते सीएमएस, व्यवस्था कैमरों के भरोसे
स्टाफ नर्स अंशु तिवारी ने आरोप लगाया कि सीएमएस सिर्फ अपने कार्यालय में ही बैठे रहते हैं और इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण करने नहीं जाते। सिर्फ कैमरों के भरोसे ही व्यवस्था देखते हैं। इस कारण अस्पताल में अनियमितताएं फैली हैं। एक स्टाफ नर्स 13 माह से छुट्टी पर है, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
छुट्टी पर थी स्टाफ नर्स, हो गई सेवा समाप्त
स्टाफ नर्स प्रीती देवी ने आरोप लगाया कि वह फतेहपुर की रहने वाली हैं। मातृत्व अवकाश पर घर गईं थीं। इसी दौरान नियम के विरुद्ध उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।
फिर बाहर आया अनन्या दीक्षित मामला
क्षेत्र के रंधीरपुर गांव निवासी मनीराम दीक्षित की बेटी अनन्या दीक्षित की पांच अक्तूबर को अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगने से मौत होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। इसके बाद मामले की जांच कराई गई। अब सीएमएस दो स्टाफ नर्सों को इस मामले का दोषी बताकर कार्रवाई होने की बात कह रहे हैं।
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