पशु अस्पताल की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां
के कमरों की छतों से रोज प्लास्टर और ईंटें टूटकर गिरती हैं। पशुपालक पशुओं
का इलाज कराने आते हैं तो उन्हें अपनी जान की चिंता बनी रहती है। वहीं
स्टाफ भी रोज जान हथेली पर रखकर काम रहा है।
क्षेत्र के पशुपालकों ने
जिला प्रशासन से अस्पताल के नवनिर्माण की मांग की है। कस्बे में बना पशु
चिकित्सालय की बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है कि हर दिन खतरा मंडराता रहता
है। अस्पताल की छतों से बरसात में पानी टपकता रहता है, जिससे अंदर रखीं
सारी दवाएं भीगकर खराब हो जाती हैं।
इसके अलावा पशुपालक पशुओं का इलाज
कराने आता है तो वह बिल्डिंग के अंदर जाने का साहस नहीं करता। उसको डर
सताता रहता है कि पता नहीं कब कोई ईंट नीचे गिर जाए। आलम यह है कि रोज ही
छतों से प्लास्टर और ईंट गिरती रहती हैं। इसके अलावा यहां तैनात स्टाफ भी
बिल्डिंग में न बैठकर बाहर ही बैठकर ड्यूटी करता है।
ऐसे में जहां
पशुपालकों को संकट का सामना करना पड़ता है और वह यहां आने से कतराने लगे
हैं, वहीं स्टाफ भी मजबूरन जान हथेली में लेकर ड्यूटी कर रहा है। क्षेत्र
के अमिताभ सिंह भदौरिया, विजय बहादुर सिंह, अवधेश सिंह, जितेंद्र सिंह
भदौरिया, राजू कठेरिया, अतुल सेंगर, शिव प्रताप सिंह भदौरिया, वेद राम
शाक्य आदि ने जिला प्रशासन से अस्पताल की बिल्ंिडग नई बनाने की मांग की है।
उधर, इस बाबत पशु चिकित्सक डा. पवन कुमार का कहना है कि उन्होंने भी इसके
लिए लिखा पढ़ी की है। बताया कि डीएम के यहां से जल्द ही भवन निर्माण के
निर्देश मिलने वाले हैं।