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पिछैती आलू पर झुलसा की मार, 20 फीसदी बेल जली

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झुलसा लगी आलू की फसल। संवाद - फोटो : KANNAUJ
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मौसम के बदलते मिजाज से आलू की फसल खतरे में है। रात में पाला और दिन में धूप से पिछैती आलू की फसल में झुलसा रोग बढ़ने लगा है। मौसम में तब्दीली न आई तो झुलसा का दायरा और बढ़ेगा।
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इस समय तकरीबन 20 फीसदी बेल जल गई है। इससे एक बीघा में 18 से 20 क्विंटल की जगह 13 से 15 क्विंटल उत्पादन मिलने की आशंका है। इससे किसान परेशान हैं।
जिले में इस बार 48 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल की गई है। करीब 28 से 29 हजार हेक्टेयर में किसानों ने पिछैती बुवाई की थी। दो दिन से रात में पाला पड़ रहा है।
इससे पहले फरवरी माह की शुरुआत में पाले ने नुकसान किया था। झुलसे का सबसे ज्यादा असर सदर ब्लाक समेत जलालाबाद, तालग्राम, उमर्दा व छिबरामऊ क्षेत्र में है।
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करीब 20 फीसदी बेल झुलस गई है। इससे एक बीघा में करीब पांच क्विंटल नुकसान की आशंका है। आलू के ताजा भाव 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल हैं। इससे किसानों को चार से पांच हजार रुपये प्रति बीघा नुकसान है।
वहीं न्यूनतम व अधिकतम तापमान को बढ़ता-घटता देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से सतर्क रहने के लिए कहा है। किसानों को झुलसा रोग से फसल बचाने के लिए दवा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जिला कृषि अधिकारी राम मिलन सिंह ने बताया कि बदली और कोहरे की वजह से झुलसा रोग लग जाता है।
जिले के प्रगतिशील किसान अगैती के साथ आलू की पिछैती खेती भी करते हैं। ज्यादातर किसानों को पिछैती खेती पर भरोसा है। यह दिसंबर की शुरुआत में फसल बोते हैं। इस आलू की मार्च में खुदाई की जाती है। गिरते-बढ़ते तापमान की वजह से झुलसा रोग लग गया है।
जिला कृषि अधिकारी राम मिलन सिंह ने बताया कि किसान मैंकोजेब/प्रोपीनेब/क्लोरो थेलोनील युक्त दवा का छिड़काव करें। दो से ढाई किलोग्राम दवा का 1000 पानी लीटर में घोल कर प्रति हेक्टेयर छिड़काव जरूरी है।
झुलसा के लक्षण दिखने पर साइमोइक्सेनील मैंकोजेब तीन किग्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। इसी तरह फेनोमेडोन मैंकोजेब तीन किग्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। बार-बार फं फू दनाशक का छिड़काव न करें।
सलेमपुर के किसान मूलचंद्र ने बताया कि घने कोहरे और बदली से झुलसा रोग शुरू हो गया है। इससे पैदावार में कमी आएगी। फसल बचाने के लिए दवा का छिड़काव कर रहे हैं।
अमोलर के संतोष कुमार का कहना है कि लगातार गिरते व चढ़ते तापमान से पिछैती आलू में झुलसा रोग बढ़ने लगा है। बीमारी बढ़ी तो किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा।
बिदीपुर्वा के छेदीलाल ने बताया कि इस मौसम में सबसे ज्यादा पिछैती आलू को नुकसान है। कोहरे से आलू के पत्ते झुलस रहे। डंठल काले हो जा रहे हैं। इससे बड़ा नुकसान होगा।
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चचियापुर के भैयालाल का कहना है कि फसल बचाने के लिए दवा का छिड़काव कर रहे हैं। अगर समय पर दवा नहीं डाली तो उत्पादन कम हो जाएगा। इससे काफी नुकसान होगा।
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