कन्नौज। जिले में ग्रामीण विकास की हकीकत प्रधान-प्रशासकों की लापरवाही से उजागर हो रही है। जिले में 228 ग्राम पंचायतों के विकास प्रस्तावों को ही मंजूरी मिल सकी है। धा जिला अब भी प्रस्तावों के इंतजार में अधर में लटका है। इससे साफ है कि गांवों में विकास की रफ्तार सुस्त ही नहीं, बल्कि ठप है।
कई ग्राम पंचायतों ने अधूरे और त्रुटिपूर्ण प्रस्ताव बनाकर भेज दिए, जिन्हें विभाग ने वापस लौटा दिया। वहीं, चार विकास खंडों से तो अब तक प्रस्ताव ही नहीं भेजे गए हैं। इससे जाहिर होता है कि प्रधान-प्रशासक गांव के विकास को लेकर कितने गंभीर हैं। कागजों में विकास के दावे हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर सड़क, नाली, सफाई जैसे बुनियादी काम भी नहीं हो पा रहे। डीएम ने उमर्दा की 90, सौरिख की 68, हसेरन की 35 और गुगरापुर की 23 पंचायतों के प्रस्तावों को ही स्वीकृति दी है। यानी चार ब्लॉकों के बाद बाकी चार ब्लॉकों का कोई अता-पता नहीं है। जिन पंचायतों के प्रस्ताव पास हुए हैं, वहां भी काम कब शुरू होगा, इसका कोई भरोसा नहीं।
जिला पंचायत राज अधिकारी जेके गोंड ने बताया कि स्वीकृत कार्यों को समय से पूरा कराने और स्वच्छता, कीटनाशक छिड़काव व फागिंग के निर्देश बीडीओ को दिए गए हैं। प्रस्ताव न भेजने वाली पंचायतों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान चुनाव के बाद से गांव में कोई काम नहीं हुआ। प्रशासन केवल निर्देश जारी कर रहा है, लेकिन लापरवाह प्रधानों पर कार्रवाई नहीं हो रही। आधे जिले में विकास अधर में लटकने से शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है।