फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फसलें बर्बाद कर रहीं नीलगाय, किसान परेशान

विज्ञापन
विज्ञापन
तालग्राम। अन्ना मवेशियों के साथ नीलगाय का इलाके में आतंक है। आंखों के सामने फसल चट होती देखकर किसान परेशान हैं। झुंड के झुंड बड़ी संख्या में तैयार फसलों को नीलगाय नष्ट कर रहे है। फसल बचाने के लिए किसान सर्द रातों में रखवाली कर रहे है।
विज्ञापन

क्षेत्र के अतरौली, किशनपुर, बेहटा, बिरौली, अमोलर, ताहपुर, मवैइया, मझैइया, भवनियापुर, सिलुआपुर, बमरौली, रोहली, पलरी, नरमऊ, वनियानी, अंदौआ और मुसाफिरपुर समेत करीब 100 गांवों में नील गायों के झुंड खेती में खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। फसलों को पनपने नहीं देते है। रात-दिन रखवाली के बावजूद पशु मेहनत से तैयार फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इन्हें काबू करने लिए वन विभाग और कृषि विभाग आगे नहीं आ रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार का कहना है कि नील गाय से फसल को नुकसान हो रहा है। इन्हें मारने के लिए अनुमति लेनी होती है। वन विभाग ही इस बारे में विचार कर रहा है।
विज्ञापन

चचियापुर गांव निवासी किसान गुरुप्रसाद का कहना है कि दलहनी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं। वनरोज पलक झपकते ही पूरी फसल चट कर जाते हैं। इन्हें मारे तो जेल जाने की नौबत आ जाती है। ऐसे में दलहनी फसलें बोना कम कर दिया है।
मुसाफिरपुर के किसान दीपचंद्र ने बताया कि अब तो आलू, गेहूं, सब्जियों को पैदा करना मुश्किल भरा है। क्षेत्र में अन्ना मवेशियों के साथ वनरोजों ने कहर बरपा रखा है। सभी किसान इनसे परेशान हैं।
चचियापुर के किसान रामसिंह राजपूत का कहना है कि नीलगाय से फसल बचाना मुश्किल हो गया है। फसल बचाने के लिए दिन-रात फसलों की रखवाली कर रहे है। वनरोजों के झुंड की संख्या बढ़ती जा रही है।
बमरौली के किसान रजनीश का कहना है कि फसलों को हानि पहुंचाने वाले इन वनरोज को मारने पर रोक है। हर कोई इन्हें हाथ लगाने से डरता है। फसल बचाने के लिए शासन-प्रशासन उपाय करें। अगर जल्द कुछ न किया गया तो किसानों की फसलें नष्ट हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें