वीवीआईपी जिले में चल रहे ठेकेदारों और सियासतदानों के गठजोड़ से पीडब्ल्यूडी के अभियंता आजिज आ गए हैं। बुधवार को निरीक्षण करने पहुंचे पीडब्ल्यूडी सचिव, मुख्य अभियंता के सामने इंजीनियरों ने प्रदर्शन किया। 57 इंजीनियरों ने सामूहिक रूप से तबादले की मांग की। सियासी दबाव की वजह से काम करने में असमर्थता जाहिर की। इंजीनियरों का यह रुख देख आला अफसरों को पसीने छूटने लगे। पीडब्ल्यूडी के आला अफसर सड़कों की गुणवत्ता जांचने के बजाय मातहतों को समझाने-बुझाने में ही फंसे रहे।
पीडब्ल्यूडी के सचिव डा. हरिओम बुधवार को सड़कों की गुणवत्ता जांचने पहुंचे थे। उनके आने से पहले ही विभाग के चीफ इंजीनियर और निदेशक क्वालिटी प्रमोशन सेल पहुंच गए थे। अफसरों के गेस्ट हाउस में होने की जानकारी मिलते ही पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता डीके श्रीवास्तव, प्रांतीय खंड के एक्सईएन संजय श्रीवास्तव, निर्माण खंड के एक्सईएन अंबिका सिंह समेत लोकनिर्माण विभाग के विभिन्न सहायक अभियंता, अवर अभियंता जुट गए। सभी जांच का विरोध करने लगे।
उनका आरोप था कि जिले के ठेकेदार राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। ऐसे में काम करने में मुश्किलें आ रही हैं। सड़कों के टेंडर से लेकर निर्माण कार्य पूरा होने तक ठेकेदार अनैतिक तरीके से दबाव डालते हैं। इस कारण राजकीय कार्यों व निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखन मुश्किल ही नहीं असंभव है। इंजीनियरों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के बीच आपसी गुटबाजी का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ता है।
ठेकेदार कार्यालय से लेकर उनके घरों तक उत्पात मचाते हैं। वे खुद और उनके परिवार के लोग हमेशा भय में जी रहे हैं। इस दौरान 57 अभियंताओं ने सचिव के सामने सामूहिक तबादले की मांग रखी। सचिव ने मामला शासन तक पहुंचाने का भरोसा देकर उन्हें शांत कराया।
निरीक्षण भवन में होती रही नारेबाजी
पीडब्ल्यूडी के सचिव व मुख्य अभियंता का इंजीनियरों ने घेराव किया। डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के अध्यक्ष आरके सिंह के नेतृत्व में पहुंचे इंजीनियरों ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि पुलिस लाइन तिराहा से जुकैया जाने वाले रोड को खुदवाकर निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता पंकज और निदेशक क्वालिटी प्रमोशन सेल ने गलत तरीकों से सड़कों की गुणवत्ता चेक की।
गिट्टी 20 इंच पड़ी थी, जबकि वह कागज पर 18 इंच लिख रहे थे। टोकने पर चीफ इंजीनियर ने अभद्रता की। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां के हालात काम करने लायक नहीं है। एक तरफ ठेकेदार प्रताड़ित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ विभागीय अफसर जांच के नाम पर उनका शोषण कर रहे हैं।
सहायक अभियंता राजेश निगम, नृपेंद्र सिंह, साकिर राव, रामप्रकाश पाल, अरुण, रमेश चंद्र, बच्चूलाल, नीरज वर्मा आदि का कहना है कि इंजीनियरों का हर तरफ से शोषण किया जा रहा है। इस मौके पर जेई वृजेंद्र मोहन, अखिलेश यादव, सूर्यवीर, सुनील आनंद, राममिलन, जेएस शाक्य, अशोक सिंह, अंजनी गौतम, अमर कुमार वर्मा, ओमपाल, शहजाद अहमद, मनोज यादव, हेमवीर सिंह, शशिपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
ठेकेदार करते पिटाई और देते धमकी
पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों के साथ ठेकेदार गुंडागर्दी पर उतारू हैं। घटिया सड़कें कागजों पर ओके दिखाकर पेमेंट न कराने पर आए दिन बंदूक तान देते हैं। कुछ महीने पहले एक ठेकेदार ने एक इंजीनियर से गालीगलौज की और मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी। जब इस मामले की शिकायत आला अफसरों तक पहुंचाई गई तो उन्होंने जेई का बचाव करने के बजाय खामोश रहने की सलाह दी। तब से इस तरह की तमाम घटनाएं हो चुकी हैं, जिस कारण इंजीनियर दहशत में जी रहे हैं।
अंदर सचिव और बाहर नारेबाजी
लोकनिर्माण विभाग के सचिव डा. हरिओम निरीक्षण भवन में बैठे डीएम, सीडीओ व अन्य अफसरों से वार्ता कर रहे थे। इसी दौरान इंजीनियर वहां पहुंच गए और नारेबाजी शरू कर दी। सीडीओ उदयराज यादव, एसडीएम सदर सुनील कुमार शुक्ला ने कई बार बाहर निकलकर इंजीनियरों को समझाने का प्रयास किया पर वे शांत नहीं हुए।
आधे घंटे तक भड़ास निकालने के बाद इंजीनियरों ने सचिव को ज्ञापन सौंपा। शिकायत करते हुए कहा कि ठेकेदार गुंडई करते हैं। तमाम ठेकेदारों को सड़क बनाने की जानकारी व अनुभव नहीं है। सड़क बनाने संबंधी समस्त उपकरण भी नहीं हैं। इसके बावजूद ठेकेदारों को गलत तरीके से काम का जिम्मा दे दिया जाता है।
शासन से सूची आने के बाद ठेकेदारों को काम कराने के लिए सड़कें बांट दी जाती हैं। सूची में बताया जाता है कि कौन सी रोड कौन ठेकेदार बनाएगा। बार-बार सूची आने के इंतजार में टेंडर तिथि बढ़ाई जाती है। सियासी कवच पहने ठेकेदार पूरी तरह से बेलगाम हैं। मानकों के अनुसार मैटेरियल डालने और गुणवत्तापरक काम कराने के लिए बार-बार कहने के बावजूद ध्यान नहीं देते।
साइट पर काम के दौरान जाने पर ठेकेदार के गुर्गे इंजीनियरों को भगा देते हैं। उलटा इंजीनियरों को ही दोषी मानकर प्रताड़ित किया जा रहा है। घटिया सड़क बनाने पर भुगतान रोको तो उच्चाधिकारी से फोन कराकर ठेकेदार दबाव बनाकर पेमेंट निकलवा लेते हैं। सचिव ने माना कि दबाव बनाया जाता है। वे कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी करेंगे। ज्ञापन देते वक्त इंजीनियर मंजीत यादव, सुरेंद्रनाथ यादव, मकरंद, राकेश, विनोद, गुरुचरन सिंह, संदीप, मनोज अग्रवाल, जोर सिंह, वीरेंद्र प्रताप, सुनील यादव, श्यामल सिंह, मुन्ना प्रसाद, प्रफुल्ल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।