इन दिनों रामलीला के आयोजन की धूम है। भगवान राम के
जीवन से जुड़ी लीला का लुत्फ लेने को तो भीड़ उमड़ती है, पर कभी किसी ने यह
गौर नहीं किया कि पात्रों को लीला करने से भी ज्यादा समय सजने संवरने में
लगता है।
यहां दिन की रामलीला में अभिनय करने वाले सभी पात्र नगर के ही
होते हैं। रामलीला के पात्रों को लीला करने से भी ज्यादा झंझट सजने संवरने
में करनी पड़ती है। कई घंटों की लंबी तपस्या पूर्ण कवायद के बाद पात्र को
उसके अनुरूप सजाकर आकर्षक ढंग से श्रंगार किया जाता है।
व्यवस्थापक
प्रेममुरारी दुबे और चंद्रहास सिंह कुशवाह के निर्देशन में रामलीला के
पात्रों को सजाने संवारने का जिम्मा अनीता दुबे, पूर्णिमा दुबे, मणि दुबे
और शिवम मिश्रा ने ले रखा है। यह सभी प्रति दिन रामलीला के पात्रों को उनके
अनुरूप सजाकर उनका भावपूर्ण श्रंगार करते हैं।
पात्रों को सजाने में जुटने
वाली अनीता, पूर्णिमा एवं मणि कहती हैं कि यह कार्य करने में उन्हें
आत्मीय संतोष मिलता है, क्योंकि यह धर्म के साथ अध्यात्म का भी एक हिस्सा
है। जो एक तरह से पुण्य कार्य की पूजा है।