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पीए सिस्टम से कानून-व्यवस्था संभालने की पहल

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पुलिस महकमे में कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए पीए सिस्टम (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) की पहल की है। अगर कोई अफवाह फैलती है या फिर किसी कारण सड़क पर भीड़ उतरी तो उसे सच्चाई बताकर माहौल को बिगड़ने से रोक लिया जाएगा। इस सिस्टम को पुलिस के वायरलेस से कनेक्ट कर दिया गया है।
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अयोध्या फैसले के बाद से पुलिस अलर्ट है। कानून-व्यवस्था बेहतर रखने के लिए पुलिस अधिकारियों की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
एसपी अमरेंद्र सिंह के निर्देश पर जिले के सभी थानों, चौकियों और सार्वजनिक स्थानों पर पीए सिस्टम लगवाए गए हैं।
पीए सिस्टम के जरिए चौकियों, थानों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे हार्न से आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों को दिशा-निर्देश के साथ संबोधित कर सकते हैं।
एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि किसी बड़ी वारदात और अफवाह के कारण सड़क पर उतरी भीड़ को नियंत्रण करने के लिए पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम से प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी अपील कर रहे हैं।
पुलिस विभाग के आरटी (रेडियो ट्रांसमिशन) वायरलेस सेट की फ्रीक्वेंसी के जरिए पीए सिस्टम पर ऑनमाइक कोई भी बोल सकता है।
पब्लिक को वारदात एवं अफवाह की हकीकत बताने के साथ ही उस क्षेत्र की पब्लिक को कंट्रोल करने के लिए भी पीए सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें एक पोल पर तीन साइड (तीन दिशाओं) में लाउडस्पीकर लगाए गए हैं।
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पूर्व एडीजी बृजलाल का है यह फार्मूला
कन्नौज। 2010 में जब हाईकोर्ट का अयोध्या पर फैसला आया था तब प्रदेश के एडीजी कानून-व्यवस्था बृजलाल थे। उन्होंने जनसहभागिता का फार्मूला लागू किया था।
उस फार्मूले से पूरे प्रदेश में कहीं भी कोई अप्रिय स्थिति नहीं सामने आई थी। जिससे इस बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पूरे प्रदेश में इस स्कीम को लागू किया गया है।
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