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कुशलपुर्वा की गोशाला में दो दिन में दो गोवंशों की मौत

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कुशलपुर्वा गोशाला में बंद गोवंश। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज/तालग्राम। सूबे की सरकार के फरमान पर जिले में बनाई गईं करीब 130 अस्थायी गोशालाएं कारगर साबित नहीं हो रही हैं। इनकी निगरानी की जिम्मेदारी प्रधान, बीडीओ, पशु चिकित्साधिकारी के पास है। यह जिम्मेदारी से कन्नी काट रहे हैं। इससे गोशालाओं में भूख-प्यास से बेहाल गोवंश दम तोड़ रहे हैं। कुशलपुर्वा में दो दिन में दो गोवंशों की मौत हो चुकी है। एक गोवंश ने शुक्रवार और दूसरे ने रविवार सुबह दम तोड़ दिया।
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जिले के अधिकारी गोशालाओं में अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। गोवंश भूख, प्यास और बीमारी से तड़पकर दम तोड़ रहे हैं। कुशलपुर्वा में पानी की टंकी परिसर में अस्थायी गोशाला संचालित है। गांव के विशाल, कमलेश, अमित, निर्मल सविता, विवेक ने बताया कि शुक्रवार को एक गोवंश की मौत हो गई थी। एक गोवंश ने रविवार सुबह दम तोड़ दिया। मृत गोवंशों को खेल मैदान के समीप मिट्टी में दबा दिया गया। इन्हें कुत्ते नोच रहे हैं। इससे बदबू आती है। लोगों का कहना है कि चारे के लिए बजट मिलता है। इसे खर्च नहीं किया जाता है। इस बजट का बंदरबांट कर लिया जाता है। भरपेट खुराक और देखभाल न होने से गोवंश दम तोड़ रहे हैं।
टिकरी गोशाला में छाया तक नसीब नहीं
टिकरी गोशाला में गोवंशों को छाया तक नसीब नहीं है। इन्हें धूप में रस्सियों से बांधा गया है। यह तड़पते रहते हैं। चारे का कोई इंतजाम नहीं है। भरपेट चारा न मिलने से गोवंश निढाल हैं। बीडीओ चंद्रभान सिंह का कहना है कि जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। मौके पर सचिव को भेजा जा रहा है।
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गोवंशों के शवों से उठ रही बदबू
तालग्राम। कुशलपुर्वा गोशाला में मृत गोवंशों को फौरी तौर पर दफन कर दिया गया है। शवों को हल्की मिट्टी से दबाया गया है। कुत्तों ने शवों को बाहर खींच लिया है। यह इन्हें नोच रहे हैं। युवा खिलाड़ी विशाल ने इस पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि खेलते समय बदबू आती है। शिकारी कुत्ते दौड़ पड़ते हैं।
18 गोवंशों की जा चुकी है जान
तालग्राम। तालग्राम क्षेत्र की गोशालाओं में भूख, प्यास और बीमारी से 18 गोवंशों की मौत हो चुकी है। कुछ माह पहले रोहली हाट बाजार में बनी गोशाला में छह गोवंशों की मौत हुई थी। कुशलपुर्वा में नौ गोवंशों की मौत हो चुकी है। इलाकाई लोगों ने बताया कि टिकरी की गोशाला में एक गाय की मौत हो गई थी। प्रधान ने रात में जेसीबी से कहीं दफन करा दिया था। निकवा में पानी की टंकी परिसर में बनी गोशाला में बीमारी से दो गोवंशों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन उदासीन है। जांच के बाद कार्रवाई रुक जाती है।
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