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चुनाव आचार संहिता ने छीना बेटियों के सगुन का हक

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कन्नौज। चुनावी सहालग ने 123 बेटियों का शगुन छीन लिया है। दरअसल, जरूरतमंद परिवार को अल्पसंख्यक विभाग की ओर से 20-20 हजार रुपये की मदद की जाती है। इस बार पहले विधानसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव की आदर्श आचार संहिता लगने के चलते विभाग ने 24 लाख 60 हजार रुपये शासन को लौटा दिए हैं।
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शासन की योजना के मुताबिक समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से जरूरतमंद की बेटियों की शादी-निकाह के लिए 20-20 हजार रुपये अनुदान यानी शगुन दिया जाता है। फार्म सैकड़ों की संख्या में आते हैं, लेकिन बजट की कमी हर साल आड़े आती है। इस बार मामला और भी गंभीर हो गया। अल्पसंख्यक विभाग को शादी अनुदान के लिए कुल 42 लाख रुपये मिले थे। इसमें से 17 लाख 40 हजार रुपये लाभार्थियों के बैंक खातों में भेज दिए गए, लेकिन 24 लाख 60 हजार रुपये शासन को लौटा दिया गया। इस बजट से 123 बेटियों के हाथ पीले हो जाते। बजट समर्पित होने के बाद बेटियों के ख्वाब टूट गए हैं। इसके पीछे चुनाव आदर्श आचार संहिता को प्रभावी होना बताया जा रहा है।
जिले में एलएलसी चुनाव नौ अप्रैल को है। इस कारण आचार संहिता प्रभावी है। शादी अनुदान भेजने में आचार संहिता का उल्लंघन होने की आशंका है, इसलिए 123 लाभार्थियों का बजट वापस कर दिया गया है।
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- छोटेलाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
पहले विधानसभा चुनाव, अब एमएलसी की आचार संहिता का साया
आठ जनवरी को विधानसभा क्षेत्र के चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी, जो 12 मार्च तक चली। उसके बाद से एमएलसी चुनाव को लेकर आचार संहिता लग गई, जो अब भी लागू है। 12 अप्रैल के बाद आचार संहिता हटेगी। उससे पहले 31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाएगा। नए वित्तीय वर्ष में आवेदन, बजट आदि की प्रक्रिया नए सिरे से होगी। उस दौरान बजट दूसरा भेजा जाएगा।
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